श्रीगुरु उवाच

व्यक्तिसे तत्व अधिक प्रभावशाली !


ख्रिस्ताब्द २००७ से मेरा स्वास्थ ठीक न होनेके कारण मैं कहीं बाहर नहीं जा सकता। तथापि गुरूकृपायोगानुसार साधना कर साधक प्रगति कर रहे हें। इससे यह ज्ञात होता है कि व्यक्तिसे  (मुझसे ) तत्व (गुरुकृपायोग )अधिक प्रभावशाली है । – परात्पर गुरु परम पूज्य डॉ. जयंत आठवले  (१७.१०.२०१३ ) संदर्भ : दैनिक सनातन प्रभात भावार्थ : […]

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श्रीगुरु उवाच


हिन्दूद्रोही कांग्रेस एवं अन्य राजकीय पक्षोंद्वारा हिंदुओंको धर्मशिक्षण नहीं देना ही स्वतंत्रता पश्चात् देशमें सर्वत्र अपराधोंमें वृद्धिका मूल कारण है ! १. बलात्कारीयोंको दंड देनेसे उनके मनके विचार नहीं जाते, वैसा विचार ही मनमें ना आए, ऐसी नैतिकता एवं सात्त्विकता समाजमें निर्माण करना, यही बलात्कार टालनेका यथार्थमें उपाय है । अनेक बार दण्डित करनेके पश्चात् चोरके […]

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श्रीगुरु उवाच


बालिकाको जंगलमें छोड देना तत्पश्चात् उसे शेर खा गया इसलिए विलाप करना, इसी प्रकार स्त्रीस्वातन्त्र्य, उनके छोटे कपडे, उनके पबमें मद्यपानपर सहमत होना एवं उसके पश्चात् लव जिहाद, बलात्कार इत्यादिका प्रमाण बढ रहा है; अतः इस सम्बन्धमें शोर मचाना, इन सबका क्या अर्थ है ? –  परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले (११.८.२०१४)

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हंसमुख रहना सीखें और स्वयंको तथा दूसरोंको आनन्द दें !


ईश्वरके गुण स्वयंमें आत्मसात हों, इस हेतु साधक साधना करते हैं । देवताके अन्य गुणोंपर साधकका ध्यान तो होता है, परन्तु देवताके तारक रूपमें उनका मुख हंसमुख और आनंदी होता है, यह कई व्यक्तियोंको ध्यान नहीं रहता । उन्हें यह भी ध्यान नहीं रहता है कि मन और शरीरका परस्पर एक दूसरेपर प्रभाव पडता है […]

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परात्पर गुरु डॉ. आठवलेका सन्देश ।


हिंदुओ, केवल वैचारिक तथा कृतिशील प्रसारमाध्यमोंके ही पाठक तथा दर्शक बनें ! नियतकालिकोंके पाठक तथा समाचार प्रणालोंके दर्शकोंको आवाहन – प.पू. डॉ. आठवले ‘श्री गणेशके विषयमें अपमानजनक समाचार प्रसारित करनेवाले हिंदूद्वेषी विचारक जैसे डॉ. जाकिर नाईक, म.फि, हुसैनके विषयमें समाचार सर्वप्रथम दैनिक ‘सनातन प्रभात’द्वारा दिए जानेके उपरांत गिने-चुने नियतकालिकोंद्वारा ही इसे प्रसिद्धी दी गई थी; […]

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श्रीगुरु उवाच


आठ वर्ष कहीं बाहर नहीं जा पानेके कारण परम पूज्य गुरुदेव डॉ. आठवलेको हुए लाभ !        पहले मैं सोचता था, वृक्ष, पर्वत, इत्यादि एक ही स्थानपर खडे होते हैं, इससे उन्हें ऊब (बोरियत) नहीं होती होगी क्या ? इसका उत्तर मुझे मेरी रुग्णावस्थामें मिला । मुझे लगता है, पिछले ८ वर्षोंमें मैं कहीं बाहर नहीं […]

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श्री गुरु उवाच


व्यासपीठको ‘व्यासपीठ’ कहते हैं क्योंकि उसपर खरा अधिकार महर्षि व्यासका है | ‘व्यासोच्छिष्टं जगत् सर्वम् ।’ जिसका अर्थ है जगतके सर्व अध्यात्मविषयक ज्ञान महर्षि व्यासके उच्छिष्ट (जूठन) है इस प्रकारकी लोकोक्ति दृढ हुई है | जब हम उसपर जाते है तो उनके प्रति कृतज्ञता स्वरूप अपने पादत्राण (चप्पल) उतार कर जाते हैं | वर्तमान समयमें […]

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अनिष्ट शक्तियोंका कष्ट दूर करना तथा सत्त्वगुणमें वृद्धि, दोनों हेतु, नामजप उपयोगी


‘अनिष्ट शक्तियोंका कष्ट दूर करना तथा सत्त्वगुणमें वृद्धि’, इन दोनों हेतु, नामजप उपयोगी ! लोग सोचते हैं, अनिष्ट शक्तियोंका कष्ट न हो तो नामजप करनेकी आवश्यकता नहीं ।  उन्हें यह समझना आवश्यक है कि स्वभावदोष रज-तम गुणोंके कारण निर्माण होते हैं । नामजपसे सत्त्वगुणमें वृद्धि होती है । उसकी वृद्धिसे रज-तम गुण अल्प होने लगते […]

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त्यौहार और व्रतका वास्तविक अर्थ !


त्यौहार और व्रतका वास्तविक अर्थ ! हिंदू राष्ट्रकी स्थापना होनेतक उसके लिए अखंड प्रयत्न करना, खरा व्रत है और स्थापना होनेके उपरांत मनाए जानेवाले त्यौहार ही वास्तवमें खरे त्यौहार व उत्सव होंगे ! हिंदुओ, नवरात्रोत्सवमें सामूहिकरूपसे प्रार्थना करें ! ‘हे मां जगदंबे ! प्रतिदिन शारीरिक, मानसिक और आर्थिक माध्यमोंसे छलनेवाले राष्ट्र एवं धर्म द्रोही भ्रष्ट […]

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श्रीगुरु उवाच


जब कोई भक्त मेरे पास आता है, तब मैं उसके भूतकालको नहीं देखता, वह भविष्यमें क्या कर सकता है मैं यह देखता हूं | – परम पूज्य भक्तराज महाराज (परम पूज्य गुरुदेव डॉ. जयंत आठवलेके श्रीगुरु ) भावार्थ : जो भी जिज्ञासु या साधक संतके द्वार जाता है, संत उसके भूतकालमें जाकर यह नहीं देखते […]

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