श्रीगुरु उवाच

हिन्दुत्ववादी राजनीतिक पक्षों, ध्यान रखें सत्ता नहीं, धर्मका टिकना अधिक महत्त्वपूर्ण है !


लोकतंत्रके कारण देश तथा देशके लोगोंका आज तक कोई हित नहीं हुआ, यह पिछले ६७ वर्षोंके इतिहाससे स्पष्ट है । सत्ता आज है, कल नहीं होगी; परन्तु मानवी जीवनका सर्वांगीण उत्कर्ष साधनेवाला धर्म बना रहे; इसलिए सत्ताप्राप्तिके अल्पगामी हितोंके स्थानपर दीर्घगामी हित ध्यानमें रखते हुए धर्महित साधनेवाले निर्णय लें ! – परात्पर गुरु डॉ. जयंत […]

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श्रीगुरु उवाच


पटाखोंको अनुमति देनेवाली सर्वपक्षीय सरकारें समाजद्रोही, राष्ट्रद्रोही एवं धर्मद्रोही हैं  ! पटाखोंके कारण अब्जों (अरबों) रूपये अक्षरशः जल जाते हैं एवं इससे पर्यावरण एवं आरोग्यकी अपरिमित हानि होती है, साथ ही जब जनता अत्यधिक दारिद्र्यमें दिन काट रही है तो, स्वतंत्रतासे लेकर आजतक सर्वपक्षीय सरकारोंने पटाखोंकी अनुमति कैसे दी ? यह समाजद्रोह, राष्ट्रद्रोह एवं धर्मद्रोह है […]

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नामजप का महत्व


वेद और धर्मग्रंथ सनातन धर्मके आधार हैं | परमेश्वरने श्रृष्टिका संगोपन करने हेतु उसकी उत्त्पत्तिके समय ही वेदोंकी निर्मिती करी | मात्र ईश्वरका नाम वेदोंसे श्रेष्ट है क्योंकि वेदोंकी निर्मिति भी ओमकार अर्थात इश्वरके नामसे हुई है | अतः संत भक्तराज महाराजने कहा है कि नामजप वेद उपनिषद् जैसे धर्मग्रंथोंके परायणसे अधिक श्रेष्ठ है | […]

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श्रीगुरु उवाच


आप हमारे भ्रष्टाचारकी पोल न खोलें, हम आपका भ्रष्टाचार अनदेखा करेंगे’ ऐसा राजनीतिक पक्षोंका अलिखित करार होगा ! इसलिये कोई भी राजनितिक पक्ष सत्तामें आए, जनताको लाभ नहीं होगा ! यह स्मरण रखें एवं हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना हेतु कृतसंकल्प हों । – परम पूज्य डॉ. जयंत आठवले (११.२.२०१४) सन्दर्भ : दैनिक मराठी सनातन प्रभात

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श्रीगुरु उवाच


चुनावके घोषणापत्रमें झूठे आश्वासन देनेवाले राजनीतिक पक्षको करारा उत्तर दें ! सभी पक्षोंके चुनावघोषणापत्रोंमें ‘ये करेंगे वो करेंगे’ ऐसे आश्वासन होते हैं । उनसे पूछें, स्वतंत्रताके ६६ वर्षोंमें आजतक भारतकी और हिन्दुओंकी अधोगतिके अतिरिक्त उन्होंने क्या किया है ? ‘आज नगद कल उधार’ यह उन्हें दृढता एवं निडरतासे कहें । – – परम पूज्य डॉ. […]

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श्रीगुरु उवाच


कहां घूसखोरोंको खुला छोड देशकी चारों सीमाओंको असुरक्षित करनेवाले, शत्रुराष्ट्रसे कूटनीतिक युद्धमें पराजित होनेवाले तथा आतंकवादी एवं नक्सलियोंसे प्रतिदिन हारनेवाले आजके राज्यकर्ता और कहां शत्रुके (रावणके) राज्यमें जाकर उसका नाश करनेवाले एवं अश्वमेध यज्ञ हेतु दिग्विजय करनेवाले आदर्श राजा श्रीराम ! – परम पूज्य डॉ. जयंत आठवले (५.२.२०१२)

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श्रीगुरु उवाच


चुनाव प्रत्येक वर्ष हों  ! चुनावमें हारनेसे पूर्व २-३ वर्ष राज करना अर्थात अनुत्तीर्ण होनेवाले विद्यार्थीने कक्षामें पढाना ।यह टालने हेतु जिस प्रकार पाठशालामे प्रति वर्ष परीक्षा होती है, उसी प्रकार चुनाव करवाना आवश्यक है । इससे मदोन्मत्त राजनेताओंपर थोडी अंकुश लगेगी । यंत्र-गणनाके कारण चुनाव प्रक्रियामें देर भी नहीं लगेगी।  –  परम पूज्य डॉ. […]

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श्रीगुरु उवाच


पू. आसारामबापूके भक्तों ! पू. बापूजीको कारावास हुई है, इसपर रोनेवाले भक्त अच्छे लगेंगे या इसपर पू. बापूकी इच्छा, यह सोचनेवाले या उन्हें मुक्त कराने हेतु लडनेवाले भक्त अच्छे लगेंगे ? – परम पूज्य डॉ. जयंत आठवले (२७.६.२०१४) (ईश्वरको दृढताके साथ अन्याय हेतु प्रतिकार करनेवाले भक्त प्रिय होते हैं – तनुजा ठाकुर )

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श्री गुरु उवाच


दि २७. ९. २०१३ सरसंघचालक मोहन भागवतजीने कहा संघके ७ लक्ष १० सहस्र ७३ स्वयंसेवक स्वयंसेवक हैं। यह संख्या पर्याप्त  है। इससे उनका ध्येय कितना संकुचित है यह भान होता  है। उन्होंने निम्न सुत्र ध्यानमें रखे होते तो वे कदापि ऐसा न कहते। १. हमारे पूर्वजोंने  ‘कृण्वंतो  विश्वंक  आर्यम्   अर्थात  विश्वमे सभीको आर्य (अर्थात […]

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श्रीगुरु उवाच


हास्यास्पद पत्रकार एवं उन्हें भेजनेवाले समाचारपत्र ! किसी वकीलका साक्षात्कार करना हो तो कानूनका, आधुनिक चिकीत्सकके साक्षात्कारके लिये चिकित्साशास्त्रका थोडा बहुत ज्ञान होना आवश्यक है । इस तथ्यसे अज्ञात समाचार पत्रोंके पत्रकार कैसे हास्यास्पद प्रश्न करते हैं, यह  पूर्वाम्नाय श्रीगोवर्द्धनमठ-पुरी पीठाधीश्‍वर श्रीमज्जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्‍चलानंदसरस्वती महाराजके पत्रकार परिषदमें सामने आया । सरकारी पत्रकारोंको भेजनेवाले समाचारपत्र […]

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