कर्नाटकके पूर्व मुख्यमन्त्री सिद्धारमैयाने स्वीकार किया कि वे ‘मवेशियोंका मांस’ खाते हैं, कांग्रेस स्थापना दिवसपर वक्तव्य


३० दिसम्बर, २०२०
     कांग्रेसके वरिष्ठ नेता और कर्नाटकके पूर्व मुख्यमन्त्री सिद्धारमैयाने सोमवार, २८ दिसम्बर २०२० को स्वीकार किया कि वे मवेशीका मांस खाते हैं । उनका यह वक्तव्य कांग्रेसके स्थापना दिवसपर आया है । उन्होंने बताया कि पहले भी उन्होंने विधानसभामें यह स्वीकार किया था कि वे मवेशीका मांस भक्षण करते हैं । उन्होंने कहा कि भोजनकी प्रत्येककी अपनी अपनी रुचि है, उसपर किसी अन्यको प्रश्न करनेका अधिकार नहीं । उन्होंने कहा कि मुझे रुचिकर लगता है, तो मैं खाता हूं आपको नहीं लगे, तो न खाएं !
     गोहत्या रोधी विधेयकपर उन्होंने कहा कि गाय अथवा भैंसपर प्रतिदिन व्यय लगभग १०० रुपए होता है । किसान भले ही गोमाताकी पूजा करते हैं, बूढी गाय, भैंसोंको कहां भेजेंगे ? उनके व्ययका धन कौन देगा ?
      २०१५ में भी उन्होंने इसी प्रकारकी टिप्पणी की थी, जब उन्होंने कहा था कि मैंने आजतक गोमांस नहीं खाया है; परन्तु आप कौन होते हो मुझे यह पूछनेवाले ? उन्होंने यह भी कहा था कि कोडावा गोमांस खाते हैं; परन्तु कालान्तरमें उन्होंने अपने इस वक्तव्यपर खेद व्यक्त किया ।
     उल्लेखनीय है कि ९ दिसम्बरसे कर्नाटक राज्यमें गोहत्यापर पूर्ण प्रतिबन्ध लग गया है । ऐसा करनेवाला कर्नाटक २० वां राज्य बन गया है ।  अब जो भी व्यक्ति गोवध अथवा उनके परिवहनमें लिप्त पाया जाएगा, उसे ७ वर्षका कारावास भोगना होगा । विशेष बात यह है कि जिस दिन कर्नाटक विधानसभाद्वारा पारित अधिनियमको प्रभावी करने हेतु अध्यादेश पारित किया गया; उसी दिन पूर्व मुख्यमन्त्रीका यह वक्तव्य आया है ।
       कांग्रेस एक हिन्दूद्रोही पक्ष है । केरलमें सार्वजनिक रूपसे बछडा काटकर, पकाकर कांग्रेसके नेता यह सिद्ध कर चुके हैं । अब कर्नाटक भाजपाद्वारा शासित होनेसे गोरक्षा हेतु यह विधान पारित हुआ है; परन्तु सिद्धारमैया जैसे निधर्मी अपनी वास्तविक मानसिकता दिखा रहे हैं और आश्चर्य है कि ऐसे निधर्मी एक धर्मसापेक्ष राष्ट्रमें किसी राज्यके मुख्यमन्त्री बन कैसे जाते हैं ? – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ 

स्रोत : ऑप इंडिया



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