इस महाविद्यालयका प्रत्येक छात्र जाना चाहता है सेना में, १२ दे चुके हैं देशके लिए प्राणोंकी आहुति !


अगस्त ७, २०१८

सदैव शान्त रहने वाले नगरमें एक महाविद्यालय एेसा भी है, जहांके सैकडों छात्र सेनामें प्रवेश लेकर देशसेवामें लगे हैं ! इस महाविद्यालयसे निकले १२ छात्र सेनामें प्रवेश लेकर देशके लिए प्राण न्यौछावर कर चुके हैं ! यह महाविद्यालय ‘सेक्टर १०’का ‘डीएवी कालेज’ है ।

डीएवी महाविद्यालयका वातावरण ही ऐसा है कि प्रत्येक युवा स्वयंको गौरवान्वित अनुभव करता है । कारगिल युद्धमें ही नहीं, बल्कि समय-समयपर डीएवीके उत्तीर्ण विद्यार्थियोंने देशके लिए प्राण दिए है । इतने युवा सैनिक देनेके पश्चात भी महाविद्यालयका कार्य अभी समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि प्रत्येक वर्ष महाविद्यालयके युवाओंका सेनामें प्रवेश करनेका क्रम जारी है । महाविद्यालयमें प्रत्येक वर्ष २४० युवा ‘एनसीसी’के ‘सी सर्टिफिकेट’ लेकर महाविद्यालयसे उत्तीर्ण होते हैं और अब तक महाविद्यालय दस वर्षोंमें ही ६० से अधिक सैन्य अधिकारी देशको दे चुका है ।


महाविद्यालयके युवाओंकी निष्ठा और शौर्यको देखते हुए प्रशासनिक भवनका नाम ‘शौर्य भवन’ रखा गया है । कारगिल युद्धमें अपनी बहादुरीसे शत्रुको ‘नाको चने चबाने’ वाले नायक विक्रम बतरा और सन्दीप सागरकी स्मृति चण्डीगढही नहीं पूरे देशके लोगोंके मनमें है ।

डीएवी महाविद्यालयके पूर्व प्रधानाचार्य प्रो. आरसी जीवनके अनुसार महाविद्यालयका शिक्षा प्रारूप ही ऐसा है कि विद्यार्थीके चहुंमुखी विकासपर ध्यान हो तथा उसमें देशभक्तिकी भावनाका संचार हो । इसके लिए जहां ‘एनसीसी’के सेना, एयर और नेवल विभागमें विद्यार्थियोंकी भागीदारी रहती है, वहीं महाविद्यालयके पहलेके विद्यार्थियोंकी वीरताकी कथाओंको भी सुनाया जाता है ।
महाविद्यालयका प्रत्येक विद्यार्थी हुतात्माओंकी प्रतिमाके सामने से गुजरते हुए और ‘शहीद गैलरी’में जाकर स्वयंको गौरवान्वित अनुभव करता है । महाविद्यालयमें ८० के दशकसे एनसीसी है । विज्ञान विभागके पद (सीटें) यहांपर शेष महाविद्यालयोंसे सदैव अधिक रहती थी । महाविद्यालयमें एनसीसी विद्यार्थियोंको प्रोत्साहन दिया जाता है । महाविद्यालयमें एनसीसी लेने वाले अधिकांश विज्ञान विद्यार्थी है और विज्ञानमें गणित मुख्य विषय है, जो कि सेनाके परीक्षणमें बहुत काम आता है ।

देशके लिए प्राण देने वाले डीएवीके १२ विद्यार्थियोंमें सबसे प्रथम हुतात्मा होने वाले सैन्याधिकारी अनिल यादव थे । उसके पश्चात रोहित कौशलने प्राण दिए, जिन्हें मरणोपरान्त शौर्य चक्रसे सम्मानित किया गया । उसके पश्चात मेजर सन्दीप सागर थे, जिन्होंने कारगिल युद्धमें प्राण त्यागे । इसी युद्धमें कैप्टन विक्रम बतरा भी हुतात्मा हुए थे । राजस्थानसे आकर डीएवी महाविद्यालय सेक्टर-१० में विद्यार्थियों चयनमें धाक जमाने वाले कैप्टन रिपुदमन सिंहको भी युवा स्मरण करता है । उसके पश्चात हुतात्मा होने वालोंमें मेजर मनविंदर सिंह, मेजर नवनीत वत्स, फ्लाइट लेफ्टिनेंट गुरसिमरत सिंह, ब्रिगेडियर बीएस शेरगिल, कैप्टन अतुल शर्मा, राजीव सन्धू और कैप्टन विजयन्त थापर रहे ।


डीएवी सेक्टर-१० में पढाने वाले प्रो. रविन्द्र डोगरा इनको स्मरण करके रो पडते है । डोगराका कहना है कि भारत-पाक युद्धमें मैंने अपने ६ पुत्रोंको खोया है । महाविद्यालयकी गतिविधियोंका प्रभारी होनेके कारण वह विद्यार्थियोंके निकट थे । कैप्टन विक्रम बत्रा, कैप्टन रिपुदमन, मेजर सन्दीप सागर, कैप्टन अतुल शर्मा, फ्लाइट लेफ्टिनेण्ट गुरमिसरत सिंह ढीण्डसा, और मेजर नवनीत सिंहके वह बहुत ही निकट थे । डोगराके अनुसार देशके लिए प्राण देने वाले यह छह युवाओंने अपने जीवनका लक्ष्य पहले ही निर्धारित किया हुआ था ।

डीएवी महाविद्यालय सेक्टर-१० के प्राधानाचार्य डॉ. बीसी जोसनका कहना है कि प्राण देने वाले युवा देशका गौरव है । महाविद्यालयके युवाओं से लेकर अध्यापकोंके दिवसका आरम्भ इन हुतात्माओंको नमन करनेसे होती है । इसके अतिरिक्त मैं समय-समयपर विद्यार्थियोंको हुतात्माओंके बारे में बताता हैं, ताकि वह प्रेरित हो सके और देश सेवाके लिए सदैव तत्पर रहें !

स्रोत : दैनिक जागरण



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