केरलकी सरकारी पत्रिकामें (मैगजीन) ‘कन्फैशन’पर लेख आनेपर वास्तविकता सामने आनेसे भडके ईसाई


नवम्बर १५, १०१८

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोगने ईसाई समुदायकी धार्मिक भावनाओंको ठेस पहुंचाने वाले एक लेखको लेकर केरलके मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशकको नोटिस जारी किया है । यह लेख केरलकी सरकारी पत्रिकामें छपा था, जिसपर आयोगने कडा रुख अपनाते हुए राज्य सरकारसे इस प्रकरणमें विस्तृत विवरण मांगा है ।

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोगके उपाध्यक्ष जॉर्ज कूरियनने बताया कि केरल सरकारके संस्थान ‘केरल भाषा इंस्टीट्यूट’की ओरसे मलयालम भाषामें छपने वाली मासिक पत्रिका ‘विंजना कैराली’में ‘लाजिकापेद्दन’ अर्थात ‘लज्जित होना’ शीर्षकसे एक लेख छपा था । यह लेख अगस्त माहमें छापा गया था, लेकिन अक्टूबरमें इसे पुनः प्रकाशित किया गया । उन्होंने बताया कि इस लेखमें ईसाई समुदायके प्रति बहुत अशोभनीय बातें लिखी गई थीं ।

कूरियन के मुताबिक केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल ने इस लेख पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे ईसाई समुदाय की भावना को ठेस पहुंचने वाला बताया। जिसके बाद काउंसिल की तरफ से सोसा पाकम ने आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। पाकम ने अपनी शिकायत में लिखा कि ईसाई समुदाय में ‘कन्फेशन’ को पवित्र माना जाता है और इस लेख में समुदाय के प्रति अपमान और निंदात्मक भाषा का इस्तेमाल किया गया है। उनकी शिकायत के मुताबिक राज्य सरकार के संस्थान इस तरह का प्रोपेगंडा फैला कर समाज में किसी धर्म के प्रति नफरत का वातावरण बना रहे हैं।

आयोगके उपाध्यक्ष कूरियनने बताया कि आयोगने उनकी परिवादपर संज्ञान लेते हुए १३ नवंबरको आदेश जारी कर केरल राज्यके मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशकसे एक सप्ताहके भीतर विस्तृत विवरण भेजनेको कहा है ।

इससे पूर्व जुलाईमें भी आयोगने एक ऐसे ही प्रकरणमें कडा रुख अपनाया था, जब राष्ट्रीय महिला आयोगने ईसाई पादरियोंपर ‘कन्फेशन’की आडमें महिलाओंको भयादोहन (ब्लैकमेल) करने और उनका यौन उत्पीडनका आरोप लगाते हुए इस परम्परापर प्रतिबन्ध लगानेकी सिफारिश की थी, जिसके पश्चात उपाध्यक्ष जॉर्ज कूरियनने सिफारिशका कडा विरोध जताते हुए प्रधानमंत्री मोदी और गृहमन्त्रीको पत्र भी लिखा था ।

 

“‘कन्फैशन’की ओटमें ईसाई पादरी महिलाओंका वर्षोंसे शोषण कर रहे थे और धनका और धर्मद्रोही सरकारोंका आश्रय लेकर धर्मान्तरण, परन्तु अब इनका सत्य लोगोंके समक्ष उजागर होने लगा है ! हिन्दुवादी सरकारें भी बिना देर किए कठोरसे कठोर कार्यवाही कर इन्हें भारतसे बाहरकी राह दिखाए, ऐसी उनसे अपेक्षा है”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : अमर उजाला



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