ईसाई धर्मान्तरण करनेवाली टेरेसाकी संस्थामें बांधकर रखे जाते थे बच्चे, नन स्वयंको मारती थीं कोडे
२६ मई, २०२१
‘The Turning: The Sisters Who Left’ नामक ‘पॉडकास्ट’में टेरेसाके उस पक्षको दिखाया गया है, जिससे अधिकांश लोग अनभिज्ञ हैं ।
इसमें एक महिलाकी कहानी है, जो अपने समाजकी साम्प्रदायिक व्यवस्थासे बाहर निकलना चाहती है और टेरेसाकी ‘मिशनरी’में फंस जाती है ।
कोलकाताके एक चिकित्सकने इसका रहस्योद्घाटन किया था कि कैसे टेरेसाद्वारा चलाए जा रहे ‘मिशनरी ऑफ चैरिटी’में उनके साथ अत्याचार किया जाता था । टेरेसाको निर्धनता और पीडा देखनेमें प्रसन्नता होती थी, अनाथोंको ‘मिशनरी’ गृहमें बांधकर रखा जाता था । पीडाकी स्थितिमें उन्हें ‘एस्पिरिन’के अतिरिक्त अन्य औषधि नहीं दी जाती थी, व्यय बचानेके लिए टेरेसा एक ही ‘इंजेक्शन’के ‘नीडल’को अनेक बार प्रयोगमें लाती थीं और उनके अनाथालयमें शौचालयकी व्यवस्था नहीं होती थी । पीडित एक-दूसरेके सामने ही मलमूत्रका त्याग करते थे । इसके अतिरिक्त और भी घटनाएं हैं, जो लिखी नहीं जा सकती हैं ।
किस प्रकार यह ईसाई ‘मिशनरियां’ भारतमें निर्धनता और पीडितोंका लाभ उठाकर अपना छद्म धर्मान्तरणका कार्य करती हैं । केन्द्र शासनको इसके विरुद्ध कडा विधान बनाना चाहिए और इनको प्रतिबन्धित करना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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