‘खतने’के समय २३ दिवसका बच्चा चोटिल होनेपर मानवाधिकार आयोगने दिया दो लाखके अनुदान देनेका आदेश !!


जनवरी ७, २०१९


केरलके मानवाधिकार आयोगने राज्य शासनको ‘खतना’ करनेके समय चोटिल हुए २३ दिवसके एक बच्चेके परिवारको अनुदान प्रदान करनेको कहा है । चिकित्सकीय असावधानीके कारण बच्चेका निजी अंग चोटिल हो गया था । एक वक्तव्यमें केरल राज्य मानवाधिकार आयोगने कहा है कि उत्तरी मलप्पुरम जनपदमें एक चिकित्सालयमें खतनाके समय बच्चेके निजी अंगका ७५ प्रतिशत अंग कट गया । खतना करने वाले चिकित्सकको शल्यचिकित्सा करनेका केवल तीन वर्षका अनुभव था । चिकित्सकके अधिक अनुभवी नहीं होनेके कारण बच्चा गम्भीर रूपसे चोटिल हो गया ।

मानवाधिकार आयोगने कहा कि जिस चिकित्सालयमें बच्चेकी शल्यचिकित्सा हुई, वहांपर सुविधाओंकी न्यूनता थी । ‘केएसएचआरसी’के सदस्य पी. मोहनदासने राज्यके मुख्य सचिवको बच्चेके कुटुम्बको अन्तरिम राशिके रूपमें दो लाख रूपये देनेका निर्देश दिया और राज्यके स्वास्थ्य विभागसे एक ब्यौरा भी मांगा है । बच्चोंकी शल्यचिकित्साके लिए अभिभावकों और चिकित्सकोंके मध्य और अधिक जागरूकता प्रसारितके भी निर्देश दिए गए हैं । अपने विवरणमें स्वास्थ्य विभागने कहा था कि बच्चेके अभिभावकको उसके उपचारके लिए डेढ लाख रूपयोंसे अधिक व्यय करना पडा ।

 


“खतना एक अवैज्ञानिक व निराधार प्रथा है, जिससे  बालकको कोई लाभ नहीं होता है और यह प्रथा राष्ट्रद्वारा पोषित भी नहीं है; क्योंकि यह एक इस्लामिक राष्ट्र भी नहीं है; अतः मानवाधिकार आयोगकी परिवारको अनुदान देनेकी मांग निराधार है । शासनद्वारा ऐसी कुप्रथाको बन्द करना ही उचित है”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : आजतक



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