भारतीय सेनाने २० चीनी सैनिकोंको चोटिलकर खदेडा, सीमामें घुसनेका कर रहे थे प्रयास


२६ जनवरी, २०२१
       भारत-चीन सैनिकोंके मध्य इस झडपके पश्चात पूर्वी लद्दाखके मोल्डोमें भारत और चीनके सैन्य अधिकारियोंके मध्य बैठक हुई । लगभग १५ घण्टे चली इस बैठकका निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है ।
‘एलएसी’पर चल रहे भारत और चीनके विवादके मध्य एक बार पुनः सिक्किममें दोनों पक्षोंमें झडप हुई है । कहा जा रहा है कि तीन दिन पहले चीनने भारतकी सीमामें घुसकर यथास्थितिको परिवर्तित करनेका प्रयास किया; परन्तु तभी भारतीय सैनिकोंने उन्हें रोका और खदेडकर पुनः उनके क्षेत्रमें भेज दिया । इस मध्य ही झडप भी हुई, जिसमें २० चीनी सैनिक चोटिल हुए । वहीं भारतके भी ४ सैनिकोंको चोटें आईं ।
     समाचारोंके अनुसार, सिक्किमके नाकुलामें यह झडप हुई थी, जिसके कारण वहां स्थिति तनावपूर्ण थी; परन्तु स्थिति अब नियन्त्रणमें है । कहा जा रहा है कि झडपके समय शस्त्रोंका प्रयोग नहीं हुआ; परन्तु दोनों देशोंके सैनिकोंको चोटें आई हैं । एक वरिष्ठ अधिकारीने बताया कि भारतीय क्षेत्रके साथ सभी ‘प्वाइंट’पर ‘मौसम’की स्थिति विकट होनेके पश्चात भी कडी चौकसी की जा रही है ।
          १९६२ का युद्ध,  १९७५ की हिंसाके पश्चात पिछलेवर्ष डोकलाममें झडप, उसके पश्चात २०२० में गलवान घाटीका संघर्ष, कुछ दिन पहले अरुणाचल प्रदेशमें वास्तविक नियन्त्रण रेखाके निकट गांव बसाना और इस घटनामें सिक्किमके नाकुलामें झडप; यह सब प्रकरण चीनके विस्तारवादी और अधिनायकवादी होनेकी ओर इङ्गित करते हैं । चीन एक ऐसा देश है, जिसे कोई बडा पाठ पढाए बिना वह अपना विस्तारवादी व्यवहार छोडेगा नहीं । आवश्यकता है कि भारत कूटनीतिक रूपसे कुछ देशोंका समूह बनाकर चीनके विरुद्ध आक्रामक कार्यवाही करे और उसे पाठ पढाए, जिससे भविष्यमें चीन ऐसे अतिक्रमण करनेसे पहले १०० बार सोचे । यद्यपि हमारी सेनाने चीनको उत्तर दिया है, जिसकी चीनको अपेक्षा नहीं थी; परन्तु अब यह पूर्वका नहीं, वरन आजका जाग्रत भारत है ।  – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ 

स्रोत : ऑप इंडिया



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