शास्त्रीय नृत्याङ्गना स्मिता राजनने मोपला हिन्दू नरसंहारका सत्य किया उजागर
१ सिंतबर, २०२१
स्मिता राजनका नाम मोहिनीअट्टमके सर्वश्रेष्ठ कलाकारोंमें लिया जाता है । स्मिता प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्याङ्गना कल्याणीकुट्टी ‘अम्मा’की नातिन हैं । उन्होंने एक ‘फेसबुक पोस्ट’के माध्यमसे, उन इतिहासकारों और बुद्धिजीवियोंको लक्ष्य बनाया है, जो मोपला हिन्दू नरसंहारपर आवरण डाल, इसे ‘स्वतन्त्रता आन्दोलन’ बतानेका प्रयास करते हैं । साथ ही बताया है कि कैसे इस नरसंहारके मध्य इस्लामवादियोंने उनकी नानीके पैतृक घरपर आक्रमण किया था । आज भी इस घरपर मुसलमानोंका आधिपत्य है ।
स्मिताने बताया है कि जब उनकी नानीको धार्मिक कट्टरताके कारण १९२१ में प्राण बचाकर भागना पडा, तब वह केवल छह वर्ष की थीं । उन्होंने लिखा है कि धार्मिक कट्टरपन्थियोंके एक समूहने कल्याणीकुट्टी ‘अम्मा’के घरको मोपला हिन्दू नरसंहारके मध्य एक रात्रि घेर लिया था । उनका परिवार उस समय भयभीत था ।
स्मिता राजन अपनी ‘पोस्ट’में आगे लिखती हैं, “महिलाओं और बच्चोंको घरके पिछले द्वारसे वनमें भागनेके लिए विवश होना पडा था । आक्रमणकी रात्रि कई परिवार अपने घरों, खेतोंको छोडकर अपने प्राण बचानेके लिए अन्धकारमें ही नदी पार कर गए थे । कई अभागे, जो पलायन नहीं कर सके, उन्हें क्रूरतासे मार दिया गया । सुप्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्याङ्गना कल्याणीकुट्टी ‘अम्मा’ उस समय केवल छह वर्षकी बच्ची थी, जो प्राण बचानेके लिए अपनी मातृभूमिसे भाग गई थी ।”
खिलाफत आन्दोलनका सक्रिय समर्थक वरियमकुन्नथुने अपने मित्र अली मुसलीयरके साथ मिलकर मोपला उपद्रवका नेतृत्व किया, जिसमें १० सहस्र हिन्दुओंको केरलसे मारा गया । माना जाता है कि इसके पश्चात प्राय: १ लाख हिन्दुओंको केरल छोडनेपर विवश किया गया । इस मध्य हिन्दू मन्दिरोंको ध्वस्त किया गया । बलात धर्मान्तरण हुए और कई प्रकारके ऐसे अत्याचार हिन्दुओंपर किए गए, जिन्हें शब्दोंमें वक्तव्य कर पाना प्राय: असम्भव है ।
मोपलामें हुए नरसंहारमें ‘अम्मा’ जैसे कई हिन्दुओंका शोषण हुआ था । अपने ही देशमें,आन्दोलनके नामपर कट्टरपन्थियोंने हिन्दुओंकी हत्या की । जिसे इतिहासकारों और बुद्धिजीवियोंने देशसे छुपाया था । ऐसी सहस्रों सत्य घटनाएं हैं, जो हिन्दुओंकी पीडाको दर्शाती है; अतः ऐसा पुनः न हो, इस हेतु हिन्दुओं, सङ्गठित रहे और ऐसे नरसंहारको आन्दोलनका नाम देकर छुपानेका प्रयास करनेवाले हिन्दूद्रोहियोंका विरोध करें ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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