देवी-देवताओंपर अपशब्द बोलनेवाले फारुकीके बचावमें सामने आया एक और ‘कॉमेडियन’


२० जनवरी, २०२१
     ‘कॉमेडियन’ समय रैनाने १९ जनवरीको कश्मीरी पण्डित नरसंहारकी ३१वीं वर्षगांठका सङ्केत देते हुए ‘कॉमेडियन’ मुनव्वर फारुकीके कारावासमें बन्द रहनेको लेकर भारतीय न्यायिक प्रणालीको कोसा । उल्लेखनीय है कि मुनव्वर फारुकीको इस मासके आरम्भमें हिन्दू देवताओं, गोधराकी घटना और केन्द्रीय गृह मन्त्री अमित शाहके विरुद्ध अभद्र टिप्पणी करनेके लिए बन्दी बनाया गया था ।
     समय रैनाने ‘ट्वीट’ किया, “आज कश्मीरी पण्डित
 नरसंहारके ३१ वर्ष पूर्ण हो गए हैं । मैं चाहता हूं कि मैं अपनी मातृभूमि, कश्मीर लौट जाऊं, जहां मुझे अपनी न्यायिक प्रणालीकी मृत्युके विषयमें पढनेके लिए ‘इंटरनेट’ नहीं होगा ।”
     रैना, जो स्वयं कश्मीरी पण्डित हैं, उसने कश्मीरी पण्डितोंके पलायनकी दुखद घटना व्यक्त करनेके स्थानपर ‘कॉमेडियन’ मुनव्वर फारुकीके बन्दीकरणके विरुद्ध ‘प्रोपेगेंडा’ फैलाया ।
     मुनव्वर फारुकीको बन्दी बनानेके प्रकरणको कश्मीरी पण्डितोंके पलायनसे जोडकर रैनाने उन कश्मीरी पण्डितोंद्वारा सहन की गई भयावहताको तुच्छ बता दिया, जो अपने ही देशमें शरणार्थीकी भांति रह रहे हैं । वहीं इसके विपरीत, फारुकी लम्बे समयसे हिन्दू देवताओं और हिन्दू धर्मके विरुद्ध सतत भडकाऊ और अपमानजनक टिप्पणी कर रहा है ।
           हिन्दू होनेपर भी और वह भी कश्मीरी पण्डित होकर यह व्यक्ति जिहादी फारुकीका पक्ष ले रहा है । यह ऐसा एकाकी नहीं है । आज अपने ही पूर्वजोंकी कीर्ति व सङ्घर्षको कलङ्कित करनेवाले ऐसे अनेक जन्म हिन्दू हैं, जो अपने देश, अपने कुलके साथ छल कर रहे हैं । ऐसे लोग केवल देशपर कोढ हैं और इनका अन्त भी आतङ्कियोंकी भांति ही आवश्यक है; क्योंकि आतङ्कका समर्थक हिन्दू हो या कोई और वह आतङ्की ही होगा ‌। – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ 

स्रोत : ऑप इंडिया



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