‘कन्फेशन’ समाप्त करनेके प्रस्तावपर ईसाई संगठनने प्रधानमन्त्रीको ज्ञापन दे विरोध प्रकट किया


जुलाई २७, २०१८

केरलके ‘कैथोलिक बिशप कॉन्फ्रेंस’ने प्रधानमन्त्रीको एक ज्ञापन देकर विरोध दिखाया है कि गिरिजाघरमें ‘कन्फेशन’की प्रथाको बन्द करनेके लिए ‘राष्ट्रीय महिला आयोग’का प्रस्ताव अनुचित है । ‘आर्कबिशप ऑफ लैटिन आर्किडोसिस ऑफ त्रिवेन्द्रम’ सोसाई पाकीमने मोदीको भेजे एक ज्ञापनमें कहा, ‘राष्ट्रीय महिला आयोगकी अध्यक्ष हमें इसे समाप्त करनेका आदेश नहीं दे सकती हैं !’

इससे पूर्व राष्ट्रीय महिला आयोगने कहा था कि गिरिजाघरमें ‘कन्फेशन’की प्रथाको समाप्त कर देना चाहिए; क्योंकि इससे महिलाओंका भयादोहन (ब्लैकमेल) किया जाता है । आयोगकी अध्यक्ष रेखा शर्माने कहा है कि पादरी पाप-स्वीकरणकी (कन्फेशनकी) आडमें दबाव डालकर महिलाओंसे उनके राज उगलवाते हैं और भयादोहन करते हैं । ऐसा ही एक प्रकरण केरलमें सामने आया था ।
अब महिला आयोगके इस प्रयासपर विवाद हो गया है । आर्कबिशपने कहा कि ये कथन अचम्भित करने वाला है । उन्होंने मोदीको भेजे ज्ञापनमें कहा, ‘हमारा मानना है कि महिला आयोगका उद्देश्य अल्पसंख्यकोंमें तनाव और धार्मिक अशान्ति फैलाना है ।’ उन्होंने महिला आयोगपर समाजको बांटकर राजनीतिक लाभ लेनेकी आशाका आक्षेप किया है । उन्होंने कहा कि शासनके उत्तरदायी पदपर बैठे एक व्यक्तिके ऐसे वक्तव्यकी वो कडी निन्दा करते हैं ।

उन्होंने कहा, ‘मोदी अल्पसंख्यकोंके अधिकारोंका सम्मान करनेकी बात कहते हैं; लेकिन जब ऐसे कथन सुनने को मिलते हैं तो हमें सन्देह होता है कि कोई छिपा हुआ प्रारूप भी है ।’

क्या है ‘कन्फेशन’
पादरीके समक्ष अपनी चूकोंको स्वीकार करनेकी परम्पराको ‘कन्फेशन’ कहा जाता है । माना जाता है कि अपनी चूक स्वीकार करनेसे व्यक्ति पाप मुक्त हो जाता है । इसीको लेकर रेखा शर्माने कहा था कि केरलके गिरिजाघरमें बलात्कार और यौन उत्पीडनकी घटनाओंमें वृद्धि, यह सिद्ध करती हैं कि ‘कन्फेशन’की आडमें पादरी भयादोहन करते हैं । उन्होंने इस प्रकरणकी जांच केंद्रीय विभागसे करानेकी भी मांग की है । कुछ दिवस पूर्व एक महिलाने आरोप लगाया था कि जब वह केरलके कोट्टायममें स्थित मलंकारा ऑर्थोडक्स गिरिजाघरमें ‘कन्फेशन’के लिए गई थी, तब चार पादरियोंने उसका भयादोहन करते हुए उसका यौन शौषण किया था !

स्रोत : जी न्यूज



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