केरलके वामपन्थी शासनने ताला तोडकर महादेव मन्दिरपर जमाया अधिकार, हिन्दू प्रदर्शनकारियोंने किया आत्मदाहका प्रयास 


१८ अक्टूबर, २०२१
     श्रद्धालुओंके भारी विरोधपर भी केरलके ‘सीपीआई’ शासनने कन्नूरमें स्थित मत्तनूर महादेव मन्दिरका नियन्त्रण अपने हाथमें ले लिया है । श्रद्धालु इतने आक्रोशित थे कि उन्होंने अधिकारियोंको रोकनेकी पूर्ण चेष्टा की; किन्तु अधिकारीगण किसी प्रकार मन्दिरके परिसरका ताला तोडकर भीतर घुसनेमें सफल रहे । कई श्रद्धालुओंने मन्दिर व उसकी सम्पत्तिपर अधिकारके विरोधमें वहींपर आत्मदाहका भी प्रयास किया; किन्तु केरल ‘पुलिस’ने किसी प्रकार उन्हें वहांसे पकडकर हटा दिया । हिन्दू श्रद्धालुओंने आरोप लगाया कि ‘मालाबार देवस्वोम बोर्ड’के अधिकारियोंके साथ-साथ सत्ताधारी वामपन्थी दलोंके कई कार्यकर्ता भी आए थे, जिन्होंने मन्दिर परिसरमें बलपूर्वक घुसकर फलक (बोर्ड) लगा दिया । हिन्दुओंने बताया कि इससे पूर्व कोई चेतावनी नहीं दी गई थी, जब कि पूर्वसे ही सर्वोच्च न्यायालयमें यही प्रकरण चल रहा है; इसीलिए शासनकी ये कार्यवाही अनुचित है ।
      बुरी स्थितिमें भक्तोंने इस मन्दिरको वर्ष १९७० में समृद्ध बनाया था और स्थानीय लोगोंने  पुनरुद्धारमें बडी भूमिका निभाई थी । एक कार्यकर्ता राहुल ईश्वरने कहा कि भारत भले ही १९४७ में स्वतन्त्र हो गया हो; किन्तु मन्दिरोंको स्वतन्त्रता प्राप्त नहीं हुई और अभी भी ‘अंग्रेजों’वाली पद्धति अपनाई जा रही है । उन्होंने कहा कि मुसलमानों और ईसाइयोंकी भांति हिन्दुओंको भी उनके धर्मस्थलके नियन्त्रण, प्रबन्धन और प्रशासनका अधिकार मिलना चाहिए ।
       वामपन्थी शासनका प्रहार केवल हिन्दुओंपर चलता है, ‘मस्जिदों’ और ‘चर्चों’पर नहीं । इसका कारण निर्बल हिन्दू समाज है । अस्त-व्यस्त हिन्दूसमाजको, अन्य धर्मियोंकी भांति संगठित होकर सङ्घर्ष करना होगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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