१२ दिसम्बर, २०२०
देहलीमें हुए हिन्दू-विरोधी उपद्रवको लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ‘सीपीएम’ने बुधवार, ९ दिसम्बरको केन्द्रीय गृहमन्त्री अमित शाहको उत्तरदायी बताते हुए उनपर हिंसा भडकाने और और जांचमें पक्षपातका आरोप लगाया है और ‘दी टेलीग्राफ’ने ‘सीपीएम’के इस आरोपको ‘फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट’ बताया है !
इस वर्ष फरवरी माहमें देहलीमें हुए हिन्दू विरोधी उपद्रवमें ५३ लोग मारे गए थे । मरनेवालोंमें ‘आईबी’ अधिकारी अंकित शर्मा, दिलबर नेगी सहित दोनों समुदायोंके लोग सम्मिलित थे । वर्ष १९७७ से २०११ के ३४ वर्षोंके वामपन्थी शासनके समय जितने नरसंहार हुए, उतने सम्भवतः देशके किसी दूसरे राज्यमें नहीं हुए । सेनबाडी हत्याकांडके समय ‘सीपीआई (एम)’के कार्यकर्ताओंकी भीडने घरोंमें आग लगा दी, परिवारके दो भाइयों, प्रणब कुमार सेन और मलय कुमार सेनको परिवारके सदस्योंके सामने काट दिया गया था । यही नहीं, एक निजी ‘ट्यूटर’, जितेन्द्रनाथ राय, जो परिवारमें बच्चोंको पढानेके लिए आए थे, उनको भी काट दिया गया था । बादमें मारे गए भाइयोंकी मांको अपने मृत बेटोंके रक्तसे सना चावल खानेके लिए विवश किया गया !
ये वामपन्थी दल नहीं, वरन आतङ्की व देशद्रोही दल हैं, जो आजतक भारतमें किसी न किसी राज्यमें या तो शासन कर रहे हैं, या सहयोगी हैं, जो प्रमाण है इस देशकी मूढ जनताका, जो ऐसे आतङ्कियोंको मत देकर विजयी बनाते हैं । हिन्दू राष्ट्रमें ऐसे आतङ्की दलोंका नाम लेनेवाला भी कोई नहीं होगा ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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