एकाएक हिन्दू हितैषी हुए राजनीतिक दल, कांग्रेस शिव तो भगवान विष्णुकी शरणमें सपा !


सितम्बर २७, २०१८

राजनीति क्या-क्या नहीं कराती ? हिन्दू वोटोंके लिए भाजपाके राम मन्दिर प्रकरणको काटनेके लिए अब विपक्षी दल धार्मिक प्रकरणमें पीछे रहनेको तैयार नहीं हैं ! कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी शिव भक्ति तो सपा मुखिया अखिलेश यादव विष्णु भगवानके नामपर नगर बसानेकी घोषणा करके भाजपाके हाथ से ध्रुवीकरणका साधन छीननेके प्रयासमें लगे हैं ! मतदानके लिए सबके अपने-अपने भगवान बन गए हैं !
राम मन्दिरको लेकर भाजपा हिन्दू मतोंका ध्रुवीकरण न करने पाए, इसके लिए सपा व कांग्रेस भी सक्रिय हो गई हैं ! गुजरात और कर्नाटकके पश्चात मध्य प्रदेश, राजस्थान व छत्तीसगढमें विपक्षी दलोंने भाजपाके धार्मिक प्रकरणको मतदानमें प्रभावी होनेसे बाधित करनेकी रणनीति बनानी आरम्भ कर दी है ।


राहुल गांधी अपने संसदीय क्षेत्र अमेठीके दो दिवसके भ्रमणपर आए तो उन्हें शिवभक्तके रूपमें प्रस्तुत किया गया । वे तिलक लगाए और देव दर्शन करते दिखे व कांवडियोंका रूप धर सैकडों कार्यकर्ताओंने उनका स्वागत किया । सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी धार्मिक आस्था और विश्वास दिखानेमें पीछे नहीं हैं । वे भाजपाको गत मतदानकी भांति अपने ऊपर हिन्दू विरोधी होनेका अवसर नहीं देना चाहते है ।

यही कारण है कि उन्होंने प्रदेशमें सपाकी सरकार बननेपर इटावामें लॉयन सफारीके निकट चम्बलके बीहडोंमें दो सहस्त्र एकडमें  कम्बोडियाके अंकोरवाट देवालयकी भांति विष्णु मन्दिर बनानेकी घोषणा की ! यह भी कहा कि भगवान विष्णुके नाम पर नगर बसाएंगे !

“धर्मका दिखावा करने वाले राजनीतिक दल क्या अपने पूर्वजोंके पापोंका क्षरण कर सकते हैं ? क्या वे उन हिन्दू विरोधी कृत्योंके लिए क्षमा मांग सकते है, जब सहस्त्रों राम भक्तों व गोभक्त सन्तोंपर गोलियां चलवाई थी ? क्या विष्णु व राम अपने भक्तोंपर अत्याचार करने वालोंको ऐसे ही क्षमा कर देंगे !!” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : अमर उजाला



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