मध्यप्रदेश कांग्रेस नेताका शरीयत आधारित तथाकथित राष्ट्रप्रेम, ‘वंदे मातरम’ बोलनेसे किया मना !!


मार्च १, २०१९


मध्यप्रदेशमें एक ओर कांग्रेसके नूतन शासनने प्रदेशके प्रत्येक मन्त्रालयमें माहकी प्रथम तिथिको पुलिस बैंडके साथ ‘वंदे मातरम’का गायन करनेका निर्देश जारी किया है, वहीं कांग्रेसके ही एक विधायक आरिफ मसूदने शुक्रवारको एक रैलीमें शरीयतकी आज्ञा न होनेके कारण ‘वंदे मातरम’ कहनेसे मना कर दिया । मसूद सीहोर जनपदके श्यामपुरमें ‘ऑल इंडिया मेव महासभा’के कार्यक्रमको सम्बोधित कर रहे थे । इस कार्यक्रममें देशभरके कई प्रांतोंसे मुस्लिम समुदायके लोगोंने भाग लिया था ।

मसूदने कहा, “पूर्व विधायक वंदे मातरम कह सकते हैं; परन्तु मैं ऐसा नहीं कर सकता; क्योंकि शरीयत मुझे इसकी आज्ञा नहीं देती !” उन्होंने आगे कहा, “मेव समाजकी पुस्तकें देखें । इसमें कई योद्धाओंका वर्णन है, जिन्होंने देशकी स्वतन्त्रताके लिए अपना योगदान दिया । आज भी हम इस देशके लिए प्राण देंगें और कल भी !”

कार्यक्रममें संवाददाताओंसे बात करते हुए मसूदने कहा, “हमारे देशका मान समूचे विश्वमें है; क्योंकि देशमें प्रत्येक धर्मके लोग सम्पूर्ण स्वतन्त्रतासे रहते हैं । ‘वंदे मातरम’ गानेकी जिद वे कर रहे हैं, जो अंग्रेजोंसे क्षमा मांगकर भाग गए थे ।” उन्होंने कहा, ‘मैं शरीयतका पालन करता हूं । मैं क्यों बोलूं ? देशके लिए प्राण देनेको सज्ज हूं । सीमापर जानेको सज्ज हूं । गानों और उद्घोषसे कुछ नहीं होता । सीमापर सेना लडती है, नेता नहीं । मसूदने कहा कि एक गाना गानेसे यह समझा जाए कि देशके कितने अनुगामी हैं तो यह जानकर दुःख होता है ।


सक्सेनाने कहा, “विधायक आरिफ मसूदने क्या कहा ?, उन्हें नहीं ज्ञात; क्योंकि उस समय वह कार्यकमसे जा चुके थे ।” कांग्रेस नेताने कहा कि मसूदने जो भी कहा कि वह उनकी व्यक्तिगत सोच हो सकती है और इसका उत्तर वही दे सकते हैं ।

 

“वन्दे मातरम नहीं कह सकते; परन्तु मध्यप्रदेशके वातानुकूलित कक्षमें बैठकर ये महाशय सीमापर जाकर प्राण देनेको तत्पर है ! नेता जी कह रहे हैं कि गानों और उद्घोषोंसे कुछ नहीं होता है, तो फिर क्यों पांच समय नमाज पढते हैं ? क्यों मस्जिदोंमें ध्वनिप्रसारक यन्त्रपर ५ समय गला फाडा जाता है ? इसका वे उत्तर दें । राष्ट्रकी वन्दना न करके इस्लामकी वन्दना करनेवाले नेता, क्या मध्यप्रदेशके एक छोटेसे जनपदके लिए किए कुछ जनहितके कार्य गिनवा सकते हैं ?, राष्ट्रकी बात तो जाने ही देते हैं !! स्वतन्त्रताके समय जिन्होंने बलिदान दिया, वे राष्ट्रप्रेमी थे, शरियत प्रेमी नहीं, अपनी तुलना उनसे कर कृपया उनका अपमान न करें !” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : नभाटा



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