जनवरी १३, २०१९
केरलके मुख्यमन्त्री पिनराई विजयनने ‘मासिक धर्मका उत्सव’ मनानेके एक कार्यक्रममें भाग नहीं लेकर रविवारको विवादको जन्म दे दिया । इस कार्यक्रमका आयोजन इस जैविक प्रक्रियाके साथ जुडे ‘कलंक’को समाप्त करनेके उद्देश्यसे किया गया था । दो दिवसीय कार्यक्रमका नाम ‘अपरो अर्थवम’ रखा गया था ।
इस कार्यक्रमका आयोजन राज्यमें सबरीमाला मंदिरमें मासिक धर्मवाली आयु वर्गकी महिलाओंको प्रवेशकी अनुमति देनेवाले न्यायलयके निर्णयको लागू करनेके विरुद्ध समूचे राज्यमें दक्षिणपंथी संगठनोंके व्यापक प्रदर्शनके उत्तरमें कुछ कार्यकर्ताओंने किया था । आयोजकोंने कहा कि विजयन रविवारको कार्यक्रममें भाग लेंगें । इस कार्यक्रममें वामपंथियोंकी सांस्कृतिक आदर्श माने जाने वाली व्यक्तियोंको भाग लेना था ।
विजयनने केरलमें १ जनवरीको ‘महिला वॉल’ कार्यक्रमका आयोजन किया था । सूत्रोंने बताया कि मुख्यमंत्रीने भाग हिस्सा लेनेकी सहमति नहीं दी थी । मुख्यमन्त्रीके कार्यालयद्वारा तैयार उनके कार्यक्रमका सन्दर्भ देते हुए सूत्रोंने बताया कि विजयनके रविवारको कोच्चिमें निरन्तर चार कार्यक्रम थे; परन्तु ‘अरपो अर्थवम’ कार्यक्रम सूचीमें नहीं था । सूत्रोंने दावा किया कि अति वामपन्थी विचारोंवाले लोगोंकी कार्यक्रममें उपस्थितिसे हो सकता है, केरलके मुख्यमन्त्रीने कार्यक्रममें भाग नहीं लिया हो ।
“केरलके मुख्यमन्त्री तो खुलेमें धर्मविरोधी होनेका प्रमाण दे चुके हैं तो अब किस बातकी शंंका है ? मुख्यमन्त्रीका यह सोचकर कार्यक्रममें न जाना हास्यस्पद है कि वहां अति वामपन्थी विचारधाराके लोग होंगें; क्योंकि जो खुलेमें हिन्दू धर्मका विरोधी हो, हिन्दुओंको बन्दी बनाए, जिनके संरक्षणमें गिरिजाघर, आइएस आतंकी व धर्मान्तरण फल-फूल रहा हो, उनसे भी अधिक ‘अति-वामपन्थी’ कोई हो सकता है क्या ?”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : नभाटा
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