उपनिरीक्षक (सब इंस्पेक्टर) नुरुल इस्लामने ‘थाने’में बुलाकर १३ वर्षकी बच्चीसे किया था दुष्कर्म, न्यायालयने आजीवन कारावासका दिया दण्ड


३१ मार्च, २०२२
मेघालयके एक विशेष न्यायालयने निष्कासित ‘पुलिसकर्मी’ नुरुल इस्लामको आजीवन कारावासका दण्ड दिया है । उसपर आठ लाख रुपएका अर्थदण्ड भी लगाया गया है । इस्लामपर दो अवयस्क बहनोंसे दुष्कर्मका आरोप था । इस घटनाके सामने आनेके पश्चात उसे निष्कासित कर दिया गया था । सोमवारको (२८ मार्च २०२२ को) न्यायालयने इस घटनामें दण्ड दिया है ।
दुष्कर्मकी यह घटना मार्च २०१३ की है । उस समय उप निरीक्षक नुरुल इस्लाम अमपति ‘पुलिस’ स्थानकमें प्रभारी था । यह ‘थाना’ गारो हिल्स जनपदमें आता है । पीडित बच्चियोंके पिताने आरोप लगाया था कि नुरुलने १३ मार्च २०१३ को उनकी १३ वर्षकी बच्चीको ‘थाने’में बुलाकर दुष्कर्म किया । इसके पश्चात, ३१ मार्च २०१३ को नुरुलने पीडिताके घर जाकर, उसकी १७ वर्षीया बहनके साथ बन्दूककी नोकपर दुष्कर्म किया । उसने दोनों बहनोंको मुख खोलनेपर काल्पनिक अभियोगमें फंसानेकी धमकी भी  दी थी ।
‘एनसीपीसीआर’ने (राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोगने) भी मेघालय शासनसे इस घटनामें कार्यवाहीका विवरण मांगा था । ‘एनसीपीसीआर’ने तब नुरुलको ‘थाने’के कारागृहमें रखनेके स्थानपर आवासीय ‘क्वार्टर’में रखने और ‘स्पेशल ट्रीटमेंट’ देनेका आरोप लगाया था ।
       १० वर्ष पूर्व हुए उपर्युक्त घटनापर अब जाकर न्याय दिया गया है । इतने विलम्बसे निर्णय मिलना, मेघालय सहित समूचे देशकी न्याय प्रक्रियापर एक प्रश्नचिह्न है । निर्भया काण्ड भी ऐसी ही एक प्रक्रियाका उदाहरण है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया


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