‘जेएनयू’में कोरोनासे २ माहमें १८ मृत्यु : वामपन्थियोंने बलपूर्वक खुलवाया था परिसर 


११ मई, २०२१
     देहलीके जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालयमें कोरोना सङ्क्रमण अपने चरमपर है । विश्वविद्यालयमें गत २ माहमें १२ लोगोंकी मृत्यु हो चुकी है, जबकि ‘जेएनयू’के कर्मचारियोंके अनुसार १८ लोगोंकी मृत्यु हो चुकी है । इनमें ५ मईसे १० मईतक ५ कर्मचारियोंकी मृत्यु हुई है । ये सभी शिक्षक अथवा कर्मचारी थे, तथा इन सबकी आयु ५० वर्षसे न्यून थी ।
         देहली विश्वविद्यालय शिक्षक संघके अध्यक्ष, श्री राजीब रेके अनुसार अप्रैल माहके अन्तिम सप्ताहतक ही देहली विश्वविद्यालयसे सम्बन्धित शिक्षण संस्थाओंमें ३५ से अधिक शिक्षक तथा कर्मचारियोंकी कोरोनासे मृत्यु हो चुकी थी ।
      इधर देहलीके ही जामिया विश्वविद्यालयमें व्याख्याताओं, सहायक कुलसचिव सहित ११ कर्मियोंकी मृत्यु कोरोनासे हो चुकी है ।
     वर्तमानमें ‘जेएनयू’में ३००० विद्यार्थी, १००० शिक्षक तथा अन्य कर्मचारी एवं ३५० सुरक्षाकर्मी कार्यरत हैं । सभी भयभीत हैं ।
       उल्लेखनीय है कि ‘जेएनयू’के प्रशासनने कोरोना महामारीके प्रथम लहरके सङ्क्रमणसे सुरक्षा हेतु, सभी छात्रोंको घर भेज दिया था; परन्तु वामपन्थी छात्र नेताओंने इसे केन्द्रकी इच्छापर प्रशासनका षडयन्त्र बताया था । वामपन्थी छात्र सङ्गठन ‘एआईएसएफ’ पत्र लिखकर लगातार ‘जेएनयू’ प्रशासनपर छात्रोंको पुनः बुलाने हेतु दबाब बनाता रहा ।
        इससे पूर्व अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालयमें कोरोनासे १६ वर्तमान तथा १८ सेवानिवृत्त शिक्षकोंकी मृत्युसे हाहाकार हो चुका है । वहांकी परीक्षण प्रयोगशालासे एकत्रित नमूनोंको देहलीमें जांच हेतु भेजा था । उन्हें शङ्का है कि इस परिसरमें पाया गया कोरोना वायरस अधिक घातक है ।
      वामपन्थी छात्र सङ्गठनकी मूढताके कारण कोरोनासे इतनी अधिक सङ्ख्यामें परिसरमें मृत्युका ताण्डव हुआ है । स्थानीय प्रशासनने छात्रोंको सुरक्षा कारणोंसे घर भेज दिया था । वामपन्थी छात्र सङ्गठनने महामारीकी गम्भीरताका भी उपहास किया, टीके नहीं लगवाए तथा टीकेमें भी राजनीति करते हुए केन्द्र शासनका उपहास किया । इसका दुःखद परिणाम अब सबके सामने है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : डू पॉलिटिक्स


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