‘रामभक्त हनुमानकी जय’, उद्घोषपर क्रिकेट खिलाडी वसीम जाफरको आपत्ति, खिलाडियोंसे करते रहे धार्मिक भेदभाव 


११ फरवरी, २०२१
    भारतीय ‘क्रिकेट टीम’से देशसे सम्मान प्राप्त खिलाडी वसीम जाफरपर धार्मिक भेदभाव करनेका आरोप लगा है । उन्होंने उत्तराखण्ड क्रिकेट संघके सचिव महिम वर्मा तथा मुख्य चयनकर्ता रिजवान शमशादसे विवादके उपरान्त मंगलवारको मुख्य प्रशिक्षकके पदसे त्यागपत्र दे दिया । वे एक सत्रके लिए उत्तराखण्ड ‘सीनियर टीम’के ‘कोच’ नियुक्त हुए थे, जिसके लिए उन्हें ४५ लाख रुपये वेतन दिया गया था । जाफरने महिमपर उनके कार्यमें हस्तक्षेप करनेके आरोप लगाए; परन्तु महिमने उनपर ही आरोपोंकी झडी लगा दी ।
         महिम वर्माने आरोप लगाया कि जब वे अतिथि खिलाडीके रूपमें इकबाल अब्दुल्ला, समद सल्ला तथा जय बिस्टाको लेकर आए, तो महिमने कोई आपत्ति नहीं की थी । जाफरने कुणाल चंदेलाके स्थानपर धर्मविशेषके इकबालको कप्तान बनाया । इकबालको अग्रसर करनेके उद्देश्यसे ‘ओपनर’ चंदेलाको नीचे ‘बल्लेबाजी’ करवाने लगे, जिससे ‘टीम’ हारती गई । महिमने चंदेलाको कप्तान बनाया तो क्रोधित होकर जाफरने त्वरित त्यागपत्र भेज दिया ।
          महिमने बताया कि वे ‘कैम्प’में मौलवी बुलाते थे, जिसका कारण वे ‘जुम्मेकी नमाज’ पढाना बताते थे । उत्तराखण्ड ‘टीम’ पिछले वर्षसे ‘राम भक्त हनुमानकी जय’, यह उद्घोष करती थी । जाफरने आते ही इसपर आपत्ति ली । अन्य लोगोंने जब ‘उत्तराखण्डकी जय’ नारा सुझाया, तो उन्होंने ‘जय’ शब्दपर भी आपत्ति दर्शाई तथा ‘गो उत्तराखण्ड’ नारा दिया ।

       भारतके धर्मनिरपेक्ष संविधानके अन्तर्गत धर्म विशेषका सम्मानकर हिन्दू धर्मका किसीभी प्रकारसे बहिष्कार असहनीय है । जाफर जैसे कट्टरपन्थी विचारधारा युक्त जनोंके कारण ही देशमें आतङ्कवादी गतिविधियोंको बल मिलता है, अशान्ति फैलती है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ

स्रोत : ऑप इंडिया



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