दहीके (दधि, क्षीरजं ) औषधीय गुण


दही( दधि, क्षीरजं ) एक दुग्ध-उत्पाद है जिसे दूधके जीवाण्विक किण्वनके द्वारा बनाया जाता है। लैक्टोजके किण्वनसे लैक्टिक अम्ल बनता है, जो दूधके प्रोटीनपर कार्य करके इसे दहीकी बनावट और दहीकी लाक्षणिक खटास देता है । दही अनेक प्राचीन सभ्यताओंका अंग रही है । आज यह सम्पूर्ण विश्वमें भोजनका एक अविभाज्य घटक है । यह एक पोषक खाद्य है जो स्वास्थ्यके लिए अद्वितीय रूपसे लाभकारी है । यह पोषणकी दृष्टिसे प्रोटीन, कैल्सियम, राइबोफ्लेविन, विटामिन बी-६ और विटामिन बी-१२ में समृद्ध है । दहीसे रबडी, छाछ (बटर मिल्क), लस्सी आदि पेय पदार्थ भी बनाए किए जाते हैं | भारतमें तो लोग दहीके बिना अपना खाना भी नहीं खाते | दही जमानेकी प्रक्रियामें बी विटामिनोंमें विशेषकर थायमिन, रिबोफ्लेवीन और निकोटेमाइडकी मात्रा दुगुनी हो जाती है । इसके साथ ही इसमें कुछ अच्छे विटमिन्स जैसे विटामिन बी-२, डी और पाए जाते हैं| इसके अतिरिक्त पोटाशियम, कैल्शियम, जिन्क, मॅग्नीजियम जैसे जरूरी पोषक तत्व भी होते हैं| ये पेटके रोग दूर करता है, पित्त-सांद्रव (कोलेस्टरॉल) न्यून करता है, अस्थियोंको सशक्त करता है, गुर्दे, दांतके रोग दूर करता है । इसके अतिरिक्त ये रक्तदाब (ब्लड प्रेशर) न्यून करनेमें भी लाभकारी माना जाता है । दहीके पांच प्रकार :
मन्द, स्वादु, स्वाद्वम्ल, अम्ल, अत्यम्ल

  1. मन्द दही : जो दही दूधकी तरह अस्पष्ट रस वाला अर्थात् आधा जमा हो और आधा न जमा हो, वह मन्द (कच्चा दही) कहलाता है । मन्दका(कच्चे दही) सेवन नहीं करना चाहिए । इसके सेवनसे विष्ठा तथा मूत्रकी प्रवृत्ति, वात, पित्त, कफ तथा जलन आदि रोग होते हैं ।
  2. जो दही अच्छी प्रकारसे जमा हुआ हो, मधुर खट्टापन लिए हुए हो उसे स्वादु दही कहा जाता है । स्वादु दही नाडियोंको अत्यन्त रोकने वाला और रक्तपित्तको स्वच्छ करनेवाला होता है ।
  3. जो दही अच्छेसे जमा हुआ मीठा और कषैला होता है । वह `स्वाद्वम्ल` कहलाता है । `स्वाद्वम्ल` दहीके गुण साधारण दहीके गुणोंके समान ही होते हैं
  4. जिसमें मिठास न होके खट्टापन अधिक होता है वह दही अम्ल दही कहलाती है । यह दही रक्तपित्त व कफको बढाती है ।
  5. जिसे खानेसे दांत खट्टे हो, कण्ठमें जलन हो वह अत्यमल दही कहलाता है । यह दही पाचन बढाने वाला व वायु व पित्त बनानेवाला है ।

दहीके कुछ औषधीय गुणोंके विषयमें बताने जा रहे हैं :
पाचनके लिए : दही, दूधसे भी अधिक गुणकारी होता है | साथ ही इसमें पाए जानेवाले अच्छे जीवाणु (गुड बॅक्टीरिया) आपके पाचनको सुदृढ करते हैं | इतना ही नही इसमें पाए जानेवाले गुण आपकी आंतोंको भी अच्छा रखते हैं |  इसका दैनिक प्रयोग करनेपर आपको पेटके रोग जैसे वायु विकार(गैस), भोजनका न पचना आदिमें अत्यन्त लाभ मिलता है ।
प्रतिजैविकका  (एंटी बायोटिकका)  प्रतिविष(एंटीडोटहै दही : यदि आपका लम्बा प्रतिजैविक उपचार हुआ है और उससे आपके शरीरपर नकारात्मक प्रभाव पडे हैं  तो आपको अपने शरीरको शुद्ध करने हेतु दही खा सकते हैं | दही प्रतिजैविकके लिए प्रतिविका काम करता है अर्थात् ये उनके दुष्प्रभाव न्यून करके आपको प्रतिजैविकके दुष्प्रभावोंसे बचाता है |
पोषक तत्व (वाइटमिन)बीका निर्माण : शरीर प्रायः विटामिन ‘डी’के अतिरिक्त विटामिन बी और केका निर्माण करता है | विटामिन बी और के आपकी आंतमें एक प्रतिक्रियाके द्वारा बनते हैं | जो लोग छाछका दैनिक सेवन करते हैं उनमें विटामिन ‘बी’की मात्रा अच्छी होती है और ये विटामिन आपके शरीरमें शक्तिको नियंत्रित करनेके साथ आपको स्व-प्रतिरक्षित रोग (auto-immune disease) से भी रक्षा करते हैं |
प्रतिरक्षा (इम्यूनिटी) करे अच्छी : दहीपर हुए अनेक अनुसंधानसे ये सिद्ध हो चुका है कि दैनिक दही खानेसे प्रतिरक्षा प्रणाली  (इम्यूनिटी सिस्टम) स्वस्थ और बलशाली बनता है और जब आपका रोग प्रतिरोधक तन्त्र स्वस्थ होगा तब आपको रोग और संक्रमण छू भी नहीं सकेंगे | यदि आपको बार-बार शीतप्रकोप (नजला जुखाम) होता है या बार-बार कोई संक्रमण (इन्फेक्शन) होता है तो आप हर दिन २ कटोरी दही खाकर उन्हें रोक सकते हैं ।
मुखकी देखभाल : दही आपकी पूरे मुखको अच्छा रखता है | ये मुखमें दुर्गन्धके लिए जानेवाले हाइड्रोजन सल्फाइडके प्रभावको न्यून कर आपके मुखसे दुर्गन्ध आना रोकता है | साथ ही जो लोग दैनिक दहीका सेवन करते हैं उनके दांतोंपर पीली परत, मसूडोके रोग, दांतोंमें सडन (teeth cavities) और अन्य रोग होनेके अवसर ८०% तक न्यून हो जाते हैं |  कुछ लोग इसी गुणके कारण दहीसे नियमित मंजन(ब्रश) भी करते हैं | ऐसा करनेसे आपके दांत सफेद, बलशाली और सुन्दर बनते हैं |
अस्थियोंको सशक्तीकरण : दही आपकी हड्डियोंको स्वस्थ और बलशाली बनाता है; क्योंकि ये कैल्शियम तत्वका एक अच्छा स्त्रोत होता है | दहीमें लैक्टोफैरिन नामक एक प्रोटीन पाया जाता है जो अस्थियां (हड्डियां) बनानेवाली ओस्टिओब्लास्ट उत्तकोंकी गतिविधिको बढाता है और आपके हड्डियोंके विकासको अच्छा बनाता है | इतना ही नहीं ये हड्डियोंको हानि पंहुचानेवाले ओस्टिओक्लास्ट उत्तकोंको भी न्यून करता है और आपको अस्थि-सुषिरता ( ओस्टिओपोरोसिस ) के रोगसे रक्षा करता है |
प्रोटीनका अच्छा स्त्रोत : यदि आपको एक अच्छा शाकाहारी प्रोटीन स्त्रोत चाहिए तो आप दहीको अपने खाद्य सामग्रियोंमें मिला सकते हैं | इसमे प्रोटीन अधिक मात्रामें होता है इसलिए ये उन लोगोके लिए एक अच्छा विकल्प है जो भार कम करनेवाले खाद्य पदार्थ ढूंढ रहे हैं| आपके शरीरमें वसा कम होने लगती है और आपको अपना भार नियन्त्रण(वेट कण्ट्रोल) करनेमें सहायता मिलती है |
अन्शुघात(लू )का रामबाण उपचार : ग्रीष्म ऋतुमें अन्शुघात होना और शरीरमें जलकी न्यूनता बहुत साधारण बात है | इसलिए बाहर जानेसे पहले और बाहरसे आनेके पश्चात एक गिलास छाछमें भुने हुए जीरेका चूर्ण और थोडा सा काला नमक डाल कर अवश्य पीएं । इससे अन्शुघात नहीं होगा ।
मेधाशक्तिको रखे स्वस्थ : मेधाशक्ति बढानेके लिए भी दही अत्यधिक लाभदायक हैं; क्योंकि इसमें विटामिन बी१२ अधिक मात्रामें पाया जाता है और ये विटामिन दिमागकी कार्यशैली सही बनाए रखनेमें अधिक उपयोगी माना जाता है | इसलिए यदि आपको  तीक्षण बुद्धि चाहिए तो इसका दैनिक सेवन करें |
बालोंके लिए : दहीमें मुलतानी मिट्टी मिलाकर बालोंपर लगानेसे बालोंकी चिकनाहट बढती है । यह बालोंको झडनेसे भी रोकता है ।
त्वचाके लिए : दहीमें विद्यमान विटामिन-ए, फॉस्फोरस और जिंक त्वचाको धब्बे इत्यादि हटानेके सहायक है। दहीमें बेसन मिलानेके पश्चात् १० मिनट मुखपर लगा ले, इससे त्वचामें चमक आएगी । तैलीय त्वचाके लिए दहीमें शहद मिलाकर लगाएं ।
सावधानियां : दमा, श्वांस, खांसी, कफ, सूजन, रक्तपित्त तथा ज्वर आदि रोगोंमें दहीं नहीं खाना चाहिए । रात्रिमें दही नहीं खाना चाहिए । दहीमें शहद, या जीरा और काला नमक डालकर खानेसे इसके गुण बढ जाते हैं। श्रावण मासमें इसका सेवन नहीं करना चाहिए । अधिक आम्लिक(खट्टा) दही नहीं खाना चाहिए ।

 

 

 



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