ख्रिस्ताब्द १९९२ में १०० लाख भी नहीं, २०२१ आते-आते सहस्र करोड कैसे ? दैनिक भास्करके पूर्व पत्रकारने लगाया आरोप


२४ जुलाई, २०२१
       आयकर विभागने कर चोरीके आरोपोंमें ‘मीडिया’ समूह दैनिक भास्करके विभिन्न नगरोंमें स्थित परिसरोंमें छापेमार कार्यवाही की । यह छापेमारी भोपाल, जयपुर, अहमदाबाद और कुछ अन्य स्थानोंपर की गई है । आयकर विभागकी इस कार्यवाहीके पश्चात विपक्ष एकजुट हो गया और शासनको घेरनेका क्रम आरम्भ हो गया ।
      विपक्षी दलके नेताओंने कहा कि शासनकी नीतियोंके आलोचनात्मक समाचार छापनेवाले दैनिक भास्कर और भारत समाचारपर आयकर विभागकी यह कार्यवाही ‘मीडिया’को भयभीत करनेका प्रयास है । देहलीके मुख्यमन्त्री अरविंद केजरीवाल, बंगालकी मुख्यमन्त्री ममता बनर्जी, राजस्थानके मुख्यमन्त्री अशोक गहलोत, मध्य प्रदेशके पूर्व मुख्यमन्त्री व राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह, पूर्व मुख्यमन्त्री कमलनाथके साथ देश भरके विपक्षी नेताओंने आयकर विभागकी इस कार्यवाहीपर शासनपर जमकर लक्ष्य साधा । बंगालकी मुख्यमन्त्री ममता बनर्जीने कहा कि पत्रकारों और ‘मीडिया’ समूहोंपर यह कार्यवाही लोकतन्त्रको कुचलनेका एक और क्रूर प्रयास है ।
         भारत सहित विश्वभरके  ‘मीडिया’पर निष्पक्षताके लिए प्रश्न उठ रहे हैं । ‘मीडिया’ तो या पक्षमें जाकर कृपापात्र बनता है या विपक्षमें जाकर राजनीतिक हस्तक्षेप करनेका प्रयास करता है । दैनिक भास्कर समाचारपत्रकी वास्तविकता जाननेके लिए, उनके साथ कार्य कर चुके उनके पूर्व पत्रकार एलएन शीतलका वक्तव्य ही पर्याप्त है ।
        भारतमें शासकीय नीतियोंके कारण, जहां अधिकतर व्यापार अनैतिक ढंग अपनाते हैं, वहां मीडिया भी इनसे अछूता नहीं हैं । इन्ही सब कारणोंसे हिन्दूराष्ट्र कितना अपरिहार्य है ? यह ध्यानमें आता है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : डू पॉलिटिक्स


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