जनवरी १९, २०१९
देशमें चल रही राष्ट्रविरोधी गतिविधियोंके मध्य अब एक और विरोधी सुर मुखर होता दिख रहा है ! अमृतसरमें दल खालसाकी ओरसे घोषणा की गई कि गणतन्त्र दिवसपर संगठनकी ओरसे तिरंगेके स्थानपर ‘खालसायी ध्वज’ फहराया जाएगा !! यद्यपि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह कहां फहराया जाना है ?
दूसरी ओर यह घोषणा करनेवाले दल खालसाके प्रवक्ताके वक्तव्योंसे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि यह संगठन बाहरी शक्तियोंसे जोडकर देखे जा रहे ‘रेफ्रेंडम २०२०’के साथ है । प्रवक्ताका कहना है कि यह जनमतसंग्रह सही हो सकता है ।
समाचार माध्यमोंसे मिले दल खालसाके प्रवक्ता कंवलपाल सिंह बिट्टूने कहा कि दलकी ओरसे लुधियाना, अमृतसर और होशियारपुरमें यात्राएं निकली जाएंगी और हम देशके ध्वजके स्थानपर खालसायी ध्वज लहराएंगें ! इस मध्य बिट्टूने ‘जनमतसंग्रह २०२०’के बारेमें टिप्पणी की कि यह एक ‘एनजीओ’की ओरसे कराया जा रहा सर्वेक्षण है और हाे सकता है कि यह उचित भी हो !
यदि संयुक्त राष्ट्र ऐसा जनमतसंग्रह करवाती है तो उसे उचित माना जा सकता है । वैसे भी प्रत्येक प्रश्नका उत्तर ‘हां या ना’में नहीं होता । हम २०२० के प्रबन्धकोंको भी लिखकर भेज चुके हैं कि इसका अभी तक क्या परिणाम निकला और इसका आनेवाले समयमें क्या लाभ होगा ?
जबतक हमें कोई उत्तर नहीं आता, तबतक हम उनके बारेमें कुछ भी स्पष्ट रूपसे नहीं कह सकते हैं । हमें नहीं लगता कि इसका कोई ठोस परिणाम हमारे सामने आएगा ।
कुछ समय पूर्व ही अस्तित्वमें आए नूतन दल शिरोमणि अकाली दलके (टकसाली) बारेमें दल खालसाके प्रवक्ताका कहना है कि जब इस गठबन्धनकी पूर्ण चित्र सामने आएगा तो शिरोमणि गुरद्वारा प्रबन्धक समितिके मतदानमें दल खालसा भी उनके साथ आ सकता है ।
हम केवल शिरोमणि समितिके मतदानमें उनका साथ दे सकते हैं; परन्तु दल खालसाने कभी लोकसभा या विधानसभा मतदान नहीं लडे और न ही भविष्यमें कभी लडेंगे ।
“गुरू गोविन्द सिंहजीने प्रत्येक हिन्दू घरसे एक सिंह उठाया, जिनमें पण्डित बन्दा सिंह बहादुर सदृश वीर भी थें और सिख पन्थ व खालसाकी स्थापना की थी ताकि किसी हिन्दूपर अत्याचार न हो और वे अत्याचारी मुगलोंके विरूद्ध लड पाए; परन्तु आज राष्ट्रप्रेम व मार्गदर्शनके अभावमें सभी निराधार होकर इधर-उधर भाग रहे हैं । दिशाहीन होनेसे पहले अंग्रेजोंद्वारा सिखोंको हिन्दुओंसे पृथक किया गया और एक पृथक धर्म बताया गया और राष्ट्रद्रोहियोंकेद्वारा अब एक भिन्न राष्ट्र और भिन्न ध्वज बनवानेका प्रयास किया जा रहा है, इससे ही ज्ञात होता है कि समाजमें विवेक, धर्म व सात्विकताका कितना ह्रास हुआ है और विवेकहीन समाजको देहदारी गुरुकी कितनी आवश्यकता है ! सिरपर पवित्र पगडी बांधकर सभी सिख भाइयोंके मनमें विष भरनेवाले राष्ट्रद्रोही अपनी समीक्षा करें कि इसमें गुरुग्रन्थसाहिबका क्या सन्देश है ?”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : भास्कर
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