तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामाने स्वयंको बताया ‘भारतका पुत्र’


दिसम्बर १३, २०१८

तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा और भारतका क्या जुडाव है ? देशसे लेकर विदेशतक प्रत्येक जन यह जानना चाहता है कि दलाई लामाको भारतसे इतना प्रेम क्यों है ? ऐसा ही एक प्रश्न चीनी और अमेरिकी मीडियाने भी दलाई लामासे पूछा । उनका प्रश्न था, किस कारण आप (दलाई लामा) स्वयंको भारतके पुत्रके रूपमें देखते हैं ? दलाई लामाने भी इसका उत्तर दिया । दलाई लामाने कहा, ‘मेरा दिमाग नालंदाके विचारोंसे भरा है और मेरा शरीर भारतीय व्यंजन (दाल-रोटी और डोसा) खाकर चल रहा है; इसलिए शारीरिक और मानसिक रूपसे मैं इस देशसे हूं और इसप्रकार मैं भारतका पुत्र हुआ ।’


८३ वर्षीय दलाई लामा तिब्बती आध्यात्मिक नेता है, चीन सदैव तिब्बतपर अपना दावा प्रस्तुत करता आया है । दलाई लामाको सदैव भारतके प्रति प्रेमकी भावना रही है, परन्तु चीन सदैव उनसे चिढता आया है । दलाई लामा जिस भी देश जाते हैं, चीन उसपर आपत्ति प्रकट कराता है । चीन दलाई लामाको अलगाववादी मानता है, वह सोचता है कि दलाई लामा उसके लिए समस्या हैं ।

१३वें दलाई लामाने १९१२ में तिब्बतको स्वतन्त्र घोषित कर दिया था, परन्तु १४वें दलाई लामाके चुननेकी प्रक्रियाके मध्य चीनके लोगोंने तिब्बतपर आक्रमण कर दिया । तिब्बतको इस लडाईमें पराजयका सामना करना पडा । वहीं, कुछ वर्षों पश्चात अपनी सम्प्रभुताकी मांग उठाते हुए तिब्बतके लोगोंने भी चीनी शासनके विरुद्ध विद्रोह कर दिया, यद्यपि विद्रोहियोंको इसमें सफलता नहीं मिली । जब दलाई लामाको लगा कि वह चीनी चंगुलमें बुरी तरहसे फंस जाएंगे, तब उन्होंने भारतका रुख किया । वर्ष १९५९ में दलाई लामाके साथ भारी संख्यामें तिब्बती भी भारत आए थे ।

भारतमें दलाई लामाको शरण मिलना चीनको अच्छा नहीं लगा, उस समय चीनमें माओत्से तुंगका शासन था । दलाई लामा और चीनके मध्य आरम्भ हुआ विवाद अभी तक समाप्त नहीं हुआ है । यद्यपि दलाई लामाको विश्वभरसे सहानुभूमि मिली, इसके पश्चात भी वे निर्वासनका ही जीवन जी रहे हैं । दलाई लामा भी अब स्वयंको भारतका पुत्र बोलनेमें पीछे नहीं रहते । यहीं कारण है कि दलाई लामाके भारतमें रहनेसे चीनसे सम्बन्ध प्रायः खराब रहते हैं ।

 

“दलाई लामाजीके इस वक्तव्यके लिए हम उनका अभिनन्दन करते हैं । जहां एक ओर अन्य देशसे होनेके पश्चात भी भारतने जो उनके लिए किया है, उसके लिए कृतज्ञताकी भावनासे वह अपनेको भारतका पुत्र बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आज भारतमें रहकर, यहांकी सब सुविधाएं लेकर भी राष्ट्रद्रोह कर पाकिस्तानकी जय जयकार करने वालोंके लिए यह एक शिक्षा है ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : जागरण



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