‘डरका माहौल है’वाले भारतके सबसे सत्यनिष्ठ पत्रकार ३ दिनोंसे कहां अनुपस्थित हैं ? क्या यह मौन ही आजका कार्यक्रम है ? जनता पूछ रही है ।
२४ मार्च, २०२१
जब भी कोई ऐसी घटना घटती है, जिसका आरोप किसी हिन्दू लगता है तो अनेक पत्रकारोंके साथ ही, पूर्णतः हिन्दू विरोधी पत्रकार रवीश कुमार भी कोलाहल मचाने लगते हैं और उस घटनाके आधारपर सम्पूर्ण हिन्दू समाजकी आलोचना करते हुए, हिन्दुओंमें फूट डालनेका प्रयास करते हैं । और उनके अन्य समाचार विश्लेषणोंमें, जो मुसलमानी तुष्टीकरणके पोषक होते हैं, उनमें कभी भयका वातावरण नहीं होता, कोई निराशा नहीं होती, कहीं अहिष्णुता नहीं होती, कुछ होता है तो वो होता बस और बस न्याय ! वे अपने साधारण स्वरमें विषयको उठाते हैं और इस तरह तथ्योंको रखते हैं कि जो कोई भी उनके कटघरेमें खडा होता है वह दोषी बने बिना बाहर नहीं निकलता । परन्तु इन दिनों महाराष्ट्रके गृहमन्त्रीके सौ करोड मासिक अन्यान्य स्रोतोंसे अर्जित करने सहित महाराष्ट्रके राजनेताओंके झूठके सामने आने जैसे अनेक प्रकरण उजागर हो रहे हैं और उनका इनपर मौन रहना, देशवासियोंको खल रहा है ।
वस्तुतः कुछ लोग जो स्वयंको पत्रकार कहते हैं, वे पत्रकार नहीं; अपितु आतंकियोंके अभिकर्ता (एजेंट) हैं । उन लोगोंका एकमात्र उद्देश्य हिन्दुओंका मनोबल गिराना है और उनमें फूट डालना है । ऐसे लोग हाथरस जैसी घटनापर तो बहुत बोलते हैं और राजस्थानमें एक १५ वर्षीय बालिकाके साथ ३ सप्ताहतक, १८से अधिक म्लेच्छोंद्वारा किए गए दुष्कर्मपर बोलनेमें उन्हें सांप सूंघ जाता है । क्या ये भारतके हितैषी हैं ? नहीं ! इनका बहिष्कार किया जाना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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