देहलीके चैतन्य देवकी अनुभूतियां


१. पत्रिका वितरणके समय, एक साधकके घरपर भोजन कर रहा था । भोजन श्राद्धका था; इसलिए प्रार्थना अधिक की । भोजनके मध्यमें एकाएक मैं गर्दन नीचे करके बैठ गया और ऐसा लगा जैसे परम पूज्य बाबा (भक्तराज महाराज) मुझे अपने आश्रममें बुला रहे हों और मैं इन्दौरवाले भक्त  वात्सल्य आश्रममें सूक्ष्मसे जाकर उनके समक्ष बैठ गया, उन्होंने मुझे अपने निकट बुलाया और ‘राम-राम’ कहा ।

उसके पश्चात मैंने गर्दन ऊपर करके देखा तो मनमें आया कि  पता नहीं मैं क्या-क्या सोचता हूं ? गर्दन ऊपर करते ही साधकके कक्षसे दिव्यगन्ध आने लगी ! मैंने भैयाको पूछा तो उन्होंने कहा, ‘हां, आ रही है’’, तदुपरान्त बन्द हो गई और मुझे वह ५ मिनिट  तक आती रही !

ऐसा लग रहा था कि जैसे सामने कोई बैठा है, एक आकृतिका आभास हो रहा था । मैंने सोचा बाबा हैं । मन ही मन कहा जूठा कैसे  खिलाऊं ?, जैसे उन्होंने हामी भरी और एक टुकडा उन्हें अर्पण किया, उसके पश्चात वह गन्ध चली गई । (९.९.२०१८)

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२.  पत्रिका वितरणकी सेवा करते समय बहुत थकावट अनुभव हो रही  थी और एक पग चलनेका साहस नहीं था तो प्रभुको कहा कि जब  आप यह सेवा करवा रहे हो तो थकान क्यों है?  तदुपरान्त मैं एक माताजीके पत्रिकाका नवीनीकरण करने गया और उन्होंने बडे  आदरपूर्वक जल व फल दिया, उसे ग्रहण करनेके पश्चात जब नीचे आया तो जैसे कुछ किया ही नहीं था अभी इतनी शक्ति पुनः आ गई ।

(९.८.२०१८)

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३.  २०१८ की गुरु पूर्णिमाकी बैठकसे पूर्व ३-४ दिनोंसे सोच रहा था कि चूक होनेपर मां मुझे एकाकीमें ही कहती हैं, सबके सामने क्यों  नहीं ? (समष्टि सेवामें चूकसे साधना अल्प होती है, इसलिए वह नहीं होनी चाहिए) सबके सामने कहेंगीं तो अहंकार जो कूट-कूटकर भरा है, वह निकलेगा । मेरा यह सोचना भर था कि  उस दिवससे लेकर अबतक मां प्रत्येक चूक सबके समक्ष लिखती हैं(हम सब साधकोंको मां व्हाट्सऐप्पके एक गुटके माध्यमसे व्यष्टि और संशित मार्गदर्शन देती हैं, इसीमें वे हम सभीकी चूकें भी बताती हैं) अर्थात मां मेरे मनकी सब स्थिति जानती हैं । कृतज्ञता मां ।

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४.  एक दिवस प्रातः सूर्यदेवको जल दे रहा था और मेरी अवस्था उस समय एकदम भिन्न थी । मैं एकदम शान्त, आनन्दमय व भिन्न था (उस दिवस मासिक पत्रिकाकी भाषाशुद्धिकी २० पृष्ठ सेवा पूर्ण की थी, सम्भवतः यह उसीके तेजका प्रभाव था) । पास ही एक छोटा बच्चा एक महिलाकी गोदमें बहुत रो रहा था । मैं एकाएक उस बच्चेके नेत्रोंमें प्रेमपूर्वक देखने लगा, वह बालक भी दृष्टिबन्दकी भांति मेरी ओर लगभग १५ सैकेण्डतक देखता रहा । वो महिला मुझे घूर रही थी । १५ सैकेण्डके पश्चात वो बालक चुप हो गया और तुरन्त सो गया । मैं एकबार तो अचम्भित हुआ कि यह क्या हुआ ?, यह सत्सेवाके तेजका ही प्रभाव है । (१७.७.२०१८)

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५.  एक दिवस (सितम्बर १९, २०१८) कार्यालयमें एकाएक उदर वेदना आरम्भ हो गई । प्रातःकालसे ही असहनीय वेदना हो रही थी । मैंने प्रभुको कहा कि हे प्रभु ! ‘कमसे कम’ इतनी शक्ति तो दो कि खडा होकर सेवा भेज सकूं और कर सकूं और १ मिनिटके अन्दर उदरवेदना भी ठीक हो गई व शरीरमें एकाएक शक्ति भी आ गई जो कदापि नहीं थी ! ईश्वरके चरणोंमें नमन । ( १९.७.२०१८)

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६.  जुलाई २०१८ को हुए गुरूपूर्णिमाके पूजनमें अति आनन्द आया । पूरे पूजनमें कोई विचार नहीं आया और आनन्दमें रहा, उस समय पूजनमें परमपूज्य गुरुदेव डॉ. आठवले और आपकी (तनुजा) उपस्थितिकी अनुभूति हुई । मांकी उपस्थिति एकदम स्पष्ट थी । मां एक विशिष्ट मुद्रामें थीं और मुस्कुरा रहीं थीं । मांका सूक्ष्म अस्तित्त्व इतना आनन्दमयी और प्रकाशमयी था कि उसका वर्णन नहीं कर सकता हूं, जैसे एक शान्तिका महासागर, जिसने मुझे उस समय पूर्णतया डूबो दिया हो । मां मुस्कुराती जा रही थीं, उनका प्रकाश मुझपर एवं वहां चारों ओर फैल रहा था, ऐसी स्थिति थी कि शब्द नहीं हैं, कैसे वर्णन करूं ? चरण वन्दन मां । मांने इन्दौर नहीं आने दिया था, उस समय मैं इन्दौर जाना चाहता था; परन्तु जैसा कि मांने कहा था कि ‘वहीं रहकर पूजन करें और अनुभूति लें’, यहीं उसकी अनुभूति दी । (२७.८.२०१८)

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७.  अगस्त २०१८में अमावस्याको मुझे मासिक श्राद्ध करना था, उस दिवस प्रातःकाल ही मुझे ज्वर आ गया, मुझे लगा कुछ नहीं कर पाउंगा । मुझे आभास हुआ कि यह अनिष्ट शक्तियोंका किया हुआ है । मैं किसी प्रकारसे स्वच्छता व आरतीकर, जप करने बैठा (माताजी श्राद्ध भोजकी पूर्वसिद्धता कर रही थीं,उससे पूर्व दो घण्टेका जप करते हैं) । जप दस ही मिनिटका हुआ तो तुरन्त ज्वर भाग गया और जब पिण्ड देने लगे तो माताजीको घरपर ही नामजपके समय खुले नेत्रोंसे एक मोटी जलधार दिखी, जैसे शिवजीने सूक्ष्म गंगाको घरपर भेज दिया हो और उस दिवस अत्यधिक सुखद अनुभव हुआ । (११.८.२०१८)

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८.  पितृपक्षकी षष्ठी और सप्तमी तिथिको क्रमशः दादीजी और परदादाजीका वार्षिक श्राद्ध था । जब घरपर ब्राह्मिण भोजन करने आईं तो माताजीको खुले नेत्रोंसे दादीका स्पष्ट आभास हुआ, वहीं जहां ब्राह्मिण भोजन कर रहीं थीं ! श्राद्धके तुरन्त पश्चात चाचाके पुत्रका चलभाष आया और उसने बताया कि दादी और परदादाजी दोनों स्वप्नमें आए थे । दादीजी अंगपर भभूत रमाए, भगवा पहने और माला हाथमें फेर रही थीं और परदादाजीका अभिज्ञान करवा रही थीं कि ये तुम्हारे परदादाजी है । ऐसेमें मां, आपके वक्तव्यका बोध हुआ कि ब्राह्मणके शरीरमें पूर्वज भोजन ग्रहण करते हैं व तिथिपर अपने बच्चोंके निकट आते हैं और माताजीने बताया कि उन्हें आभास हुआ कि दादीजीको भी गति मिलनेवाली है, ऐसा उन्होंने कहा ! और आज परदादाजीके श्राद्धपर भी उनके होनेका आभास हुआ, जैसे उन्होंने स्वयं प्रभुके लिए खीर बनाई हो । (३०.०९.२०१८)

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९.  एक दिवस माताजीने प्रातःकाल पूजा घरमें चढाने हेतु ३-४ घण्टोंसे मन्दिरके एक ओर पुष्प रखे थे और जैसे ही जप करनेके लिए बैठे और पुष्प अर्पण किए तो एकाएक पुष्पोंका आकार खिलकर दोगुणा हो गया और यह केवल १० सैकेण्डके अन्तरालमें हुआ !

१०. आज दीदीके घरसे दीवालीका देनेके लिए ‘एक्टिवा’पर फल लेने हेतु विपणि (बाजार) निकला था । फल क्रय करनेके पश्चात् जब चलने लगा तो विचित्र ढंगसे ‘एक्टिवा’का सन्तुलन बिगडा और गिर गया, आगे एक बडा वाहन (ट्रेक्टर) था । गिरते ही मुझे प्रथम आभास हुआ कि किसी अनिष्ट शक्तिने यह किया  है । परन्तु विचित्र था कि मुझे एक भी खरोंच नहीं आई, कुछ समयके लिए थोडी वेदना हुई, उसपर ध्यान नहीं दिया और थोडे समय पश्चात वह भी चली गई ।

११.  कल रात्रि नामजप कर रहा था तो अत्यधिक नींद आ रही थी (यह पिछले कुछ दिनोंसे हो रहा है) । नामजप करते-करते निढाल होकर बिछावनपर सो गया । २ मिनट पश्चात लगभग ९ बजे लगभग तनुजा मांका व्हाट्सऐप्पपर सत्संग आया, जैसे अर्धचेतन अवस्थामें ही मैंने सत्संग चलाया और मात्र २-३ मिनटका सत्संग सुनते ही सब नींद और थकान जैसे लुप्त हो गए | मैं फूर्तिसे उठ खडा हुआ और बिना थकान व निद्राके ईश्वरने मुझसे जप करवा लिया । इससे इस ‘मां’की वाणीमें प्रसारित होनेवाले सत्संगकी दिव्यताका बोध होता है ।

                                                                                                                                                    – चैतन्य देव, देहली  (३१.७.१८)

 



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