एक चिकित्सालय ऐसा भी : उपचारके मध्य किसी ‘कोरोना’ रोगीकी मृत्यु नहीं, ९४% का आयुर्वेदिक उपचार
०४ जून, २०२१
‘कोरोना’ संक्रमणके मध्य देहली सहित राष्ट्रके कई भागोंसे चिकित्सालयमें संक्रमितोंकी मृत्युके पश्चात असावधानी जैसे आक्षेप सम्मुख आए हैं; परन्तु राष्ट्रीय राजधानीमें एक चिकित्सालय ऐसा भी, जहां प्रविष्ट (भर्ती) होनेके पश्चात सभीके सभी संक्रमित ‘कोरोना’ मुक्त हो अपने घर लौटे ।
इस चिकित्सालयका नाम ‘ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA)’ है । वर्ष २०१७ में प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदीने इसका उद्घाटन किया था । इस चिकित्सालयमें कोरोनासे संक्रमित प्रायः ६०० रोगियोंका उपचार हुआ है । ‘AIIA’ की निदेशक ‘डॉ.’ तनुजा नेसारीने ‘पीटीआई’से वार्तामें बताया, “संस्थानमें ९४ प्रतिशतसे अधिक रोगियोंको शुद्ध आयुर्वेदिक उपचार प्रदान किया गया था और ‘भारतीय चिकित्सा अनुसन्धान परिषद’के दिशा-निर्देशोंके अनुसार जहां कहीं भी आवश्यकता थी ‘एलोपैथी’का उपयोग किया गया । यही हमारी सफलताका कारण है । हमने एक समग्र और एकीकृत दृष्टिकोण अपनाया है ।
ज्ञातव्य है कि इस चिकित्सालयमें ४० आयुर्वेद और ५ ‘एलोपैथी’के ‘डॉक्टर’ हैं । चिकित्सालयमें ‘ICU’ हैं और ‘एम्स’ व ‘राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी’ चिकित्सालयके ‘डॉक्टर’ समय-समयपर ‘ऑनलाइन’ सुझाव देते हैं । उदाहरणके लिए, वह ‘डॉक्टर्स’को बताते हैं कि उन्हें ‘ऑक्सीजन’ स्तर गिरनेपर तत्काल क्या करना है और अधिक गम्भीर प्रकरणोंपर उनके यहां स्थानान्तरित कर देना है ।
‘डॉ.’ नेसारीके अनुसार उनके संस्थानमें ९९.९९% रोगी पूर्णतः‘कोरोना’ मुक्त हुए है । ‘कोरोना’के रोगियोंके लिए ४७ ‘बेड’वाले इस चिकित्सालयमें उपचार आयुर्वेदिक औषधि, योग, हवन और प्राणायामके आधारपर किया जाता है । प्रातःकाल यज्ञ और हवन किया जाता है । साथ ही रोगियोंके लिए ‘ट्रीटमेंट शेड्यूल’में प्रार्थना, योग, ध्यान, आयुर्वेद, गरारा, अल्प व्यायाम और औषधियां दी जाती हैं ।
आयुर्वेदका यह सामर्थ्य देख विश्वके सभी तथाकथित भ्रष्ट ‘डॉक्टरों’को सावधान हो जाना चाहिए । भारत अब अपनी प्राचीन चिकित्सा पद्धतियोंका अभिज्ञान (पहचान) कर चुका है । हिन्दू राष्ट्रमें सर्वत्र ही आयुर्वेदका प्रभाव रहेगा, जिससे ये विश्व भी दुष्प्रभाव रहित उपचार हेतु भारतके समक्ष नतमस्तक होगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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