भारत आए पाकिस्तानी हिन्दुओंकी दशा कैसी है ? अमुसलमान शरणार्थियोंपर आप शासनको न्यायालयने दिया निर्देश


०७ अगस्त, २०२१ 
    गुरुवार, ५ अगस्तको एक महत्त्वपूर्ण निर्णय आया है । देहली उच्च न्यायालयने केजरीवाल शासनको एक जनहित याचिकाके प्रकरणमें निर्देश दिया कि पडोसके देशोंमें प्रताडित किए जानेके कारण जो शरणार्थी भारत आ गए हैं और देहलीमें रह रहे हैं, उनका आम आदमी पार्टी शासनको पूरा ध्यान रखना चाहिए । यह जनहित याचिका एक ‘एनजीओ’ और चार ऐसे व्यक्तियोंद्वारा प्रविष्ट की गई थी, जो पाकिस्तानसे भागकर आए हैं और देहलीके ‘मजनूंका टीला’ और सिग्नेचर ब्रिज क्षेत्रोंमें बने शरणार्थी शिविरोंमें रहते हैं ।
        सत्तासुख एवं राजनीतिक लोभ आधुनिक राजनेताओंकों कितना अन्धा बना देता है, यह केजरीवाल शासनद्वारा पाकिस्तानसे आए हिन्दू शरणार्थियोंके साथ किए जा रहे व्यवहारसे समझा जा सकता है । ‘सीएए एवं एनआरसी’ विधान ऐसे ही शरणार्थियोंकी सहायताके लिए बने थे, जिसके लिए इसी केजरीवालने ‘सीएए’के विरोधमें हुए आन्दोलनको राजनीतिक एवं आर्थिक समर्थन दिया था । अब देखना यह है रोहिंग्याकी सहायताके लिए दिन-रात एक करनेवाला देहलीकी केजरीवाल शासन देहली उच्च न्यायलयद्वारा दिए गए हिन्दू शरणार्थियोंके ‘रहन-सहन’ और पुनर्वासके परामर्श एवं आदेशको कितना क्रियान्वित करती है या नहीं ? हिन्दुओंने इस विषयपर मौन नहीं रहना चाहिए; क्योंकि जिस प्रकार न बोलनेकी वृत्ति हमारी है, उससे यदि कल को हम भी शरणार्थी बन जाएं, तो कोई बडी बात नहीं होगी । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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