देहलीकी श्रीमती कमलेश रावतकी अनुभूतियां


१.  नामजपके मध्य चन्दनकी सुगन्धका भान होना
सितम्बर २०१७ में जब उपासनासे जुडी और देहली आश्रममें गई तो तनुजा मांने ‘ॐ श्रीगुरुदेव दत्त ॐ’ का जाप करनेको कहा । जापके दूसरे दिन जैसे ही जाप आरम्भ किया तभी मुझे चन्दनकी सुगन्ध आई । यह कुछ ही समयके लिए हुआ ।
२.  नामजप करते हुए उदबत्तीकी सुगन्ध आना
सितम्बर २०१७ नवरात्रमें दोपहरमें नामजप करते हुए मुझे उदबत्तीकी सुगन्ध आई । पहले ध्यान नहीं दिया सोचा कि कोई पूजा कर रहा होगा । कुछ समय पश्चात ध्यान आया कि दोपहरमें तो कोई पूजा नहीं करता । मैंने घरके आगे पीछे जाकर जांच की तो कहीं कोई उदबत्तीकी सुगन्ध नहीं आ रही थी ।

३.  वैदिक उपासना पत्रिकासे चन्दनकी सुगन्ध आना
८ अक्टूबर, २०१७ को देहली आश्रमसे हम पति-पत्नी, मासिक पत्रिका, ‘वैदिक उपासना’ लेकर आए थे । दो दिवस पश्चात अल्पाहार करनेके पश्चात जब ग्रन्थ खोलकर पढने लगी तो मुझे चन्दनकी सुगन्ध आई । मुझे लगा ग्रन्थसे सुगन्ध आ रही है । ग्रन्थ सूंघकर देखे तो उसमेंसे कोई सुगन्ध नहीं आ रही थी । मुझे चन्दनकी सुगन्ध स्पष्ट अनुभव हुई थी । (ये सर्व अनुभूतियां पृथ्वी तत्त्वसे सम्बन्धित है । – सम्पादक)
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४.  आश्रमकी सेवाके मध्य हुई अनुभूति
अक्टूबर २०१७ माहमें जब तनुजा मांने आश्रम आकर सेवा करनेको कहा तो मुझे संशय था कि मैं आश्रम जाकर सेवा कर भी पाऊंगी या नहीं ? क्योंकि मेरा शरीर अशक्त (कमजोर) है एवं मैं घरके कार्य भी पूरे नहीं कर पाती थी तो आश्रममे कैसे सेवा कर पाऊंगी ? इसके लिए प्रथम बार आश्रममे जानेसे पूर्व मैं रात्रिसे ही परात्पर गुरुदेवजी डॉ. आठवलेजीसे प्रार्थना करनी आरम्भ कर दी । मैं सदैव देहली आश्रम जानेसे पूर्व उनसे मैं प्रार्थना अवश्य करती थी ।
सवेरे आश्रममें जानेके लिए जब जनकपुरी मेट्रोकी सीढियां चढती थी तो शरीरमें इतनी थकान होती थी कि सीढियां चढनेके लिए मुझे पतिका हाथ पकडकर चलना पडता था । सेवा कर जब घर वापस आ रही होती थी तो मेरे शरीरमे इतनी ऊर्जा होती थी कि कौशाम्बी मेट्रोसे स्टेशनकी सीढियां मैं लगभग दौडते हुए जाती थी । यह सब आश्रमके चैतन्यका ही प्रभाव था कि घरसे आश्रमको जाते हुए मुझे सीढियां चढनेके लिए सहारा लेना पडता था और आश्रमसे लौटते हुए मैं दौडते हुए सीढियां चढती थी । जब भी मैं आश्रम जाया करती थी सर्वदा ऐसा ही होता था । (यह सेवाका परिणाम है, सेवासे ईश्वरीय कृपा प्राप्त होती है ।)
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५. व्हाट्सऐप्प सत्संग पढते हुए पूज्या मांके स्वर सुनाई पडना
अक्टूबर, २०१७ में प्रतिदिनका नियम था कि सवेरे गृहकार्य करके जलपानके पश्चात नियम था कि ‘वैदिक उपासना पीठ’द्वारा प्रेषित धर्मधारा श्रव्य सत्संग जो व्हाट्सऐप्पद्वारा प्रसारित किया जाता था, उसे सत्संग सुनती थी एवं उसके लेखोंको पढती थी । एक दिन व्हाट्सऐप्प सत्संग पढते हुए जो लेख मैं पढ़ रही थी, मुझे मांके स्वरमें जो लेख मैं पढ रही थी, वह उन्हीके स्वरमें स्पष्ट ध्वनिमें सुनाई दे रहा था । अकस्मात द्वारकी घण्टी बजी और देखकर वापस आई एवं पुनः पढने लगी तो मांके स्वर सुनाई नहीं पडे । (यह आकाश तत्त्वसे सम्बन्धित अनुभूति है – सम्पादक)
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६. भगवान शिवके चित्रमें मेरी प्रार्थना अनुरूप परिवर्तन होना
अक्टूबर २०१७ में माला लेकर आंखें खोलकर नामजप करते हुए जब मैं भगवान शिवके बारे सोच रही थी तभी मुझे सनातन संस्थाद्वारा निर्मित भगवान शिवका चित्र सामनेवाली भीतपर (दीवारपर) दिखाई दिया | मैंने मन ही मन कहा, भगवन, आप पांव नीचे कीजिए मुझे उन्हें छूने हैं और मुझे भान हुआ कि भगवान शिव, अपने पांव नीचे रखनेके लिए खोल ही रहे थे और एक पांव नीचे रखा ही था तो मैं बोल पडी कि भगवन आप रहने दीजिए आप मेरे लिए अपना ध्यान भंग न करें ! मैं ऐसे ही आपके चरण छू लिया करूंगी । इसके पश्चात वे वापस ध्यानकी अवस्थामें बैठ गए । इस देखकर मुझे थोडा अचरज हुआ ।
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७. मांको दुर्गा मांके रूपमे देखना
१ जनवरी, २०१८ की अनुभूति है । मैंने उस दिवस दो कक्षोंमें सनातन संस्था निर्मित नामजपकी पट्टियां लगाई थीं । इसके पश्चात मैं शौचालय गई । वहां ऐसा लगा कि मैं गंगा स्नानके पश्चात बाहर आई तो ठण्डसे अत्यधिक अकड गई और वही जडवत हो गई । इतनेमें क्या देखती हूं कि तनुजा मां मुझे दुर्गा मांके वस्त्रोंमें लाल साडीमें दिखाई दी और मेरा हाथ पकड कर कहने लगी, “चलो दीदी !” उनके हाथ पकडते ही मेरी ‘सर्दी’ छूमन्तर हो गई और शरीरमे उष्णता (गर्माहट) आ गई । (मुझे ठण्ड सहन नहीं होती थी । जब पूज्या मांने एक बार कहा था कि हम हरिद्वार जाकर गंगा स्नान करेंगे तो मैं भयभीत गई थी । गर्मियोंमे भी वहां पानी बहुत ठण्डा होता है और सर्दियोंमें वहां स्नान करना सोचना ही मेरे लिए किसी यन्त्रणासे कम नहीं था ।)
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८. जनवरी २०१८ की एक संध्याको नामजप करते हुए विचार आया कि क्या ऐसा हो सकता है कि तनुजा मां कभी हमारे घर आएं ! अगले दिन जब आश्रम गई तो मांने आकर वार्तालाप करते हुए कहा कि कमलेश दीदी हम आपके घर आएंगे । क्या आपने सोचा था कि हम आपके घर आएंगे तो मैंने कहा, कि “कल ही मैं ऐसे सोच रही थी ।“ और वे अगस्त २०१८ में मां प्रत्यक्षमें हमारे घर आकर एक रात रुकी थीं और मेरी इच्छाको पूर्ण किया ।
९. २०.०८.२०१८ की अनुभूति
जबसे मांने सूचित किया कि वे हमारे घर आएंगी तभीसे शरीरमें बिना कारण पीडा होने लगी जो कि अगले दिन बढ गई थी । रात्रिमें भोजन करते हुए जैसे मांको मेरी पीडाका भान हो गया और उन्होंने कहा, “आपको बहुत कष्ट हो रहा है न ।” रात्रिमें वार्तालाप रूपी सत्संग करनेके पश्चात जब उठी तो मैंने अनुभव किया कि मेरे शरीरकी पीडा पूर्णतः समाप्त हो चुकी थी !
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१०. स्वप्नमें पूज्या मांके द्वारा कष्ट दूर करना
जब भी मैं रेलयानसे अपनी मांके घर जाती हूं तो रेलयानमें सार्वजनिक शौचालय उपयोग नहीं करती हूं । पिछले दो-तीन बारसे रेलके देरी होनेसे आठ दस घण्टेकी यात्राके मध्य शौचालय न जानेसे मेरे पेटके निचले भागमें पीडा होने लगी । कई बार ‘एंटीबायोटिक्सका कोर्स’ कर चुकी थी और होमियोपैथीकी औषधि भी ले चुकी थी; किन्तु विशेष अन्तर नहीं आया । जब पीडा होती थी तो दिनभर बिछावनमें लेटी रहती थी ।
आज दोपहरमें जब आंख लगीं तो मैंने स्वप्नमें देखा कि तनुजा मां आगे बढकर मेरे पेटकी जांच करते हुए कह रही हैं कि “कमलेश दीदी, बताएं कहां पीडा हो रही है ?”  इसके पश्चात मैं निद्रासे जग गई । इस घटनाके कुछ समय पश्चात मूत्रका प्रवाह ठीक हुआ और सन्ध्यातक मेरे कष्ट बहुत न्यून हो गए । इसप्रकार मांने स्वप्नमें मेरी पीडाको ठीक किया । कृतज्ञता मां ! (१८.५.२०१८ )
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११. २१.८.२०१८ की रात्रिमें मोटा तकिया लेनेसे मुझे गर्दन और कन्धोंमें बहुत पीडा हो रही थी । इसके लिए मैंने पीडानाशक वटी भी ली; किन्तु कुछ अन्तर नहीं आया । किसी कार्यसे प्रशीतक (फ्रिज) खोला तो गजरे रखे थे जो मांने स्वयं लगाने हेतु दिए थे जबमां पिछले दिवस हमारे घर आईं थी | तो मुझे उन्होंने गजरे लगाने हेतु दिए थे जो ये ये गजरे किसी साधकने उन्हें लगानेके लिए दिए था । पूज्या मांने उसे देते हुए कहा था कि इसे लगानेसे आध्यात्मिक उपाय होगा । मैंने गजरा लगाया और अनुभव किया कि इसे लगानेसे पीडामें अत्यधिक कमी आई और अगले दिनतक पीडा पूर्णतः समाप्त हो गई ।
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१२. भजन सात्त्विक स्वरमें सुननेकी इच्छा होनेपर मांद्वारा उनके यूट्यूबके लिंक्स बिना बताए साझा करना
कुछ समयसे सवेरे भजन सुननेका मन करता था । जो भजन मैने चलभाषमें संग्रहित किए थे, उन्हें सुननेका मन नहीं करता था । अब थोडी दुविधा थी कि सुने क्या; क्योंकि मांने बताया था कि आजकल अधिकांश भजन व्यावसायिक दृष्टिसे बनाए जाते हैं; अतः वे सात्त्विक नहीं होते हैं और मुझे यह भी समझमें नहीं आ रहा था कि सात्त्विक भजन कौन सा है ?, यह किससे पूछें । तभी वैदिक उपासना पीठद्वारा, हम साधकोंको महत्त्वपूर्ण सूचनाएं देने हेतु व्हाट्सऐप्पपर जो गुट बनाया गया है उसमें मांद्वारा सात्त्विक स्तोत्र एवं भजनके ‘लिंक्स’ साझा किए गए तो ऐसा लगा जैसे मांने हमारी बात सुन ली हो ।
संस्कृत भाषामे समझ तो कुछ नहीं आया । पहले श्रीगुरु पादुका स्तोत्र और महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र सुनकर सकारात्मक स्पन्दन अनुभव किए । फलस्वरूप दिनभर न तो निद्रा आई और न ही अनावश्यक व नकारात्मक विचार आए । नामजप करते हुए जो निद्राके झोंके आते थे वह भी नहीं आए और यहां तक कि उबासी भी नहीं आई ।
स्नान करते हुए प्रार्थना करना भूली; किन्तु मुख धोते समय मुझे विडियोमें निहित दुर्गा मांकी छवि दो बार दिखाई दी ।  (१.९.२०१८)
१३.  उपासनासे जुडनेसे पूर्व मैं जिस सत्संग गुटसे जुडी थी वहां यह भजन गाए जाते थे । दो दिवस पूर्व पति कपाटिकासे (अलमारीसे) पुस्तकोंकी छंटनी कर रहे थे । उन पुस्तकोंमें भजनकी पुस्तकमें यह भजन भी था अत: मुझे यह भजनका अत्यधिक तीव्रतासे स्मरण होने लगा और सोच रही थी कि यह सात्विक स्वरमें मिल जाता तो कितना अच्छा होता । आज ही पूज्यामांके द्वारा भेजे गए लिंक्समें वे भजन देखे तो बहुत प्रसन्नता हुई । मां, आप हमारे हृदयकी बात जान लेती हैं |(१३.१०.२०१८)

१३. प्रातः पतिसे राशि (पैसे) लेकर दो ‘लिफाफे’में डाले एकमें गुरुकार्य हेतु अर्पण और दूसरेमें ब्राह्मण भोजन हेतु अर्पण लिखकर कपाटिकामें (अलमारीमें) रख दिए । उसके पश्चात शरीर निढाल हो गया । शरीरकी शक्ति जैसे समाप्त हो गई । घरका कोई कार्य नहीं कर पाई और न ही स्वच्छता कर पाई । दोपहर भोजनके समयतक बेसुध जैसी पडी रही ।

किसीप्रकार सब कार्य पूर्ण किए । सन्ध्यामें जब नमक-पानीका उपचार किया तो तनुजा मांका मुख दिखाई दिया । कोई विचार मस्तिष्कमें नहीं आए । उन्हें देखते और स्मरण करते हुए समयका भान नहीं रहा । उसके पश्चात मैंने स्वयंको स्वस्थ पाया । ऐसा लगा कि मांने मुझपर आध्यात्मिक उपचार (स्पिरिचुअल हीलिंग) किया जिससे मैं स्वस्थ हो गई ।  – कमलेश रावत, देहली  (११.७.२०१८ )

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