उच्च न्यायालयका वक्तव्य, “सुनियोजित षड्यन्त्रकर भडकाया गया था दिल्ली उपद्रव”
२९ सितम्बर, २०२१
राजधानी देहलीमें गतवर्ष हुए हिन्दू-विरोधी उपद्रवोंको लेकर देहली उच्च न्यायालयने एक महत्त्वपूर्ण निर्णय लिया है । इसमें मोहम्मद इब्राहिम नामके आरोपीकी प्रतिभूति प्रार्थनाको न्यायालयने स्वीकार नहीं किया है । न्यायालयने इस प्रकरणमें यह भी कहा कि वर्ष २०२० में राजधानी देहलीमें हुए उपद्रव अचानक नहीं भडके थे; यद्यपि यह एक सुनियोजित षड्यन्त्र रचकर कराए गए थे ।
३ माहतक देहलीके शाहीनबाग और जामिया नगर क्षेत्रमें हुए कथित विरोधके पश्चात, फरवरी २०२० में देशकी राजधानीमें भीषण हिन्दू-विरोधी उपद्रव हुए थे। इसमें ५० से अधिक लोगोंका जीवन समाप्त हुआ था । जिनमें ‘पुलिस’कर्मी एवं ‘आईबी’ अधिकारीतक सम्मिलित थे ।
इस समूचे प्रकरणको लेकर ‘आम आदमी पार्टी’के निगम पार्षद ताहिर हुसैनको देहली ‘पुलिस’ने बन्दी बना लिया था; क्योंकि इस व्यक्तिके घरपर भारी मात्रामें ‘गोला-बारूद’ व आगजनीकी सामग्री पाई गई थी । साथ ही जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालयके पूर्व छात्र नेता उमर खालिदको भी ‘पुलिस’ने बन्दी बनाया था । खालिद भी उपद्रवके षड्यन्त्रमें संलिप्त पाया गया था ।
यह प्रथम दिनसे सभीको ज्ञात है कि उपद्रवके लिए जिहादियोंने पूर्व सिद्धता की थी, जिसको विपक्षी राजनीतिक दलोंका परोक्ष समर्थन था । उपद्रवके पश्चात भी कई तथाकथित ‘एनजीओ’ उपद्रवियोंको बचानेका अत्यन्त प्रयास कर रहे थे और इसी तथ्यकी पुष्टि न्यायालयने की है; तथापि हिन्दुओंमें अपेक्षित जाग्रति नहीं आई है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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