‘पोस्ट’ निन्दनीय किन्तु घृणाको प्रोत्साहन नहीं – ज्ञानवापी शिवलिंगपर ‘डीयू’के ‘हिन्दू’ प्राध्यापकको प्रतिभूति देनेवाले न्यायाधीशने स्वयंको भी कहा हिन्दू
२२ मई, २०२२
वाराणसीके विवादित ज्ञानवापी ढांचेके ‘वीडियोग्राफिक’ निरीक्षणमें सामने आए शिवलिंगको लेकर अभद्र टिप्पणी करनेवाले देहली विश्वविद्यालयके ‘प्रोफेसर’ रतनलालको प्रतिभूति मिल गई है । रतनलालने स्वयंको एक हिन्दू बताया ।
रतनलालको शनिवारको (२१ मई २०२२ को) तीस हजारी न्यायालयके मुख्य ‘मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट’ सिद्धार्थ मलिकको न्यायालयमें प्रस्तुत किया गया था । न्यायालयने रतनलालको शिवलिंगके विषयमें कोई भी ‘सोशल मीडिया’ ‘पोस्ट’ या किसी भी प्रकारका साक्षात्कार देनेसे भी मना किया है ।
न्यायाधीश मलिकने अपने आदेशमें कहा, “व्यक्तिगत जीवनमें अधोहस्ताक्षरी (जज) स्वयं हिन्दू धर्मका एक गौरवान्वित अनुयायी है और इस ‘पोस्ट’को विवादास्पद विषयपर की गई अरुचिकर और अनावश्यक टिप्पणी मानता है ।”
न्यायाधीश सिद्धार्थ मालिकने यह निर्णयसे सम्भवतः वर्तमान संविधानके अधीन दिया है और उनकी टिप्पणी इस पीडाको व्यक्त कर रही है । भगवानका अपमान करनेवालेको कठोर दण्डका विधान बनाया जाना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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