जनवरी २४, २०१९
दारुल उलूम देवबंदने गणतन्त्र दिवसको लेकर अपने छात्रोंके घूमने-फिरनेपर प्रतिबन्ध लगानेका प्रकरण अभी रूका भी नहीं कि अब एक नूतनविवाद विवाद सामने आ गया है। एक देवबंदी उलेमा ने गणतन्त्र दिवसके अवसरपर ‘वंदेमातरम और भारत माताकी जय’ बोलनेके लिए मना किया है और इसके पीछे उनका तर्क है कि यह इस्लामके विरुद्ध है और इसको कहनेसे ही देशभक्ति सिद्ध नहीं होगी ।
मदरसा जामिया हुसैनियाके मुफ्ती तारिक कासमीने कहा है कि इस्लाममें अल्लाहके अतिरिक्त किसी और की पूजा नहीं की जा सकती है । इस कारण मुसलमान भारत माताकी जय या वंदे मातरम नहीं बोल सकते वो चाहे वह मदरसेके पढनेवाले छात्र हो अथवा कोई भी अन्य व्यक्ति हो !
देवबंदी उलेमाने कहा कि यह बात समझसे परे है कि क्या उद्घोष लगानेसे देशभक्ति सिद्ध होती है । मुसलमानोंने पहले भी देशभक्ति उद्घोष लगाए हैं और आगे भी लगाते रहेंगे; परन्तु भारत माताकी जयके उद्घोष बिल्कुल नहीं लगाएंगे; क्योंकि इस्लाममें अल्लाहके अतिरिक्त किसी औरकी पूजा नहीं की जाती है ।
उन्होंने कहा कि हम हिन्दुस्तान जिन्दाबादके उद्घोष लगा सकते हैं, इसीसे हमने अंग्रेजोंको भगाया था । हिंदुस्तान जिंदाबाद है और जिंदाबाद रहेगा; परन्तु हम वंदे मातरम नहीं कहेंगें ।
“मुसलमान कहता है कि अल्लाहकी पूजाके लिए उन्हें मस्जिद नहीं चाहिए; क्योंकि अल्लाह प्रत्येक ओर है तो हम कहीं भी नमाज कर सकते हैं और जब बात राष्ट्रकी आती है, जो उन्हें आश्रय दिए है, उसमें उन्हें अल्लाह नहीं दिखता है, जो उसकी वन्दना नहीं कर सकते हैं ! उस महिलामें अल्लाह नहीं दिखता है, जो इनकी पत्नी, पुत्री है, और हिन्दुओंको तो विषकारी दृष्टिसे देखते हैं !! इससे ही इनका ढोंग व मौलवियोंद्वारा भरा गया इस्लामिक विषका बोध होता है; परन्तु इस राष्ट्रमें यही विधान है, तो यहीं पालन करना होगा, अन्यथा अनेक इस्लामिक राष्ट्र खुले हैं; भारतमें रहकर वन्दे मातरम न कहना धर्मका नहीं, राष्ट्रद्रोहिताका प्रकरण है और विडम्बना है कि ऐसी विषकारी मानसिकताको हिन्दुस्तान अभीतक आश्रय दिए है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : टाइम्सनाउ
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