जुलाई ८, २०१८
देशमें मुसलमानोंका सबसे बडा संगठन ‘अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’ अब इस्लामी विधानके अनुरूप प्रकरणको हल करनेके लिए देशके सभी प्रान्तोंमें दारुल-कजा अर्थात शरीयत न्यायालय खोलनेकी योजना बना रहा है । इस प्रस्तावको चर्चाके लिए १५ जुलाईको दिल्लीमें होने वाली ‘मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’की बैठकमें पेश किया जाएगा ।
बोर्डके वरिष्ठ अधिकारी जफरयाब जिलानीने बताया कि वर्तमानमें उत्तर प्रदेशमें ४० ऐसे न्यायालय चल रहे हैं । हम देशके सभी प्रान्तोंमें ‘कम से कम’ एक ऐसा न्यायालय खोलनेकी योजना बना रहे हैं । उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य अन्य अदालतोंके स्थानपर ‘शरीयत’ नियमोंके अनुसार प्रकरणको हल करना है ।
बता दें कि इसको खोलने और उसे चलानेके लिए लगभग ५० सहस्त्र रुपयोंकी आवश्यकता पडती है । जिलानीने कहा कि ‘अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’की होने वाली बैठकमें इसके लिए संसाधन कैसे जुटाए जाएं ?, इसपर चर्चाकी जाएगी ।
अधिवक्ता, न्यायाधीशों और नागरिकोंको ‘शरीयत’ नियमोंके बारेमें जागरूक करनेके विचारसे बोर्ड अपनी ‘तफिम-ए-शरीयत’ समितिको भी सक्रिय करेगा । उन्होंने कहा कि ‘तफिम-ए-शरीयत’ समिति १५ वर्ष पुरानी है और इसे अधिवक्ता और न्यायाधीशोंको बनानेका कार्य सौंपा गया है । यह देशके विभिन्न भागोंमें सम्मेलन और कार्यशालाएं आयोजितकर ‘शरीयत’ नियमोंके बारेमें सूचना देता है ।
जिलानीने कहा कि समितिके कई कार्यक्रमोंमें न्यायाधीश भी भाग लेते हैं । इसके अतिरिक्त प्रसार तन्त्रको इन कार्यक्रमोंमें आमन्त्रित किया जाता है, ताकि ‘शरीयत’के नियमोंको अच्छे रूपसे जनताके मध्य लाया जा सके ।
इन कार्यक्रमोंमें तलाक और सम्पत्ति सहित अनेक समस्याओंपर विचारकर, उनके हलके बारेमें बताया जाता है । उन्होंने कहा कि देशके हर प्रान्तमें ‘शरीयत’ न्यायालय खोलनेका उद्देश्य यह है कि मुस्लिम समाज अपनी समस्याओंको अन्य न्यायालयोंमें ले जानेके स्थानपर यहींपर सुलझाए, जिससे उनका ‘शरीयत’पर विश्वास भी बढेगा ।
स्रोत : अमर उजाला
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