यदि पूर्वकाल समान प्रत्येक राजनेता या उसके पुत्रको सेनामें सम्मिलित होकर देशकी बाह्य एवं आन्तरिक सुरक्षा करना अनिवार्य होता तो क्या स्वतन्त्रताके सात दशक पश्चात इस देशमें आजतक पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादकी समस्या होती ? आजके राजनेता मात्र नेतागिरी करते हैं; इसलिए पडोसी शत्रु-राष्ट्रके संरक्षणमें इस देशमें आतंकवाद फलफूल रहा है ! पूर्वकालमें राज्यकर्ताओंको युद्धमें जाना आवश्यक होता था, यह क्षत्रिय धर्मका अविभाज्य अंग था, यह नियम पुनः लागू होना चाहिए । जब उनके अपने पुत्रोंके एवं स्वयंके प्राण प्रत्येक क्षण संकटमें होंगे तो पाकिस्तान नामके किसी देशका अस्तित्त्व, इस राष्ट्रके आस-पास नहीं होगा ! हिन्दू राष्ट्रमें राज्यकर्ताओंको सीमापर जाकर देशकी सुरक्षा हेतु समय देना, शत्रुसे युद्ध करना, उस हेतु नीतियां बनाना एवं सीमावर्ती या युद्ध क्षेत्रमें उन्हें कार्यान्वित करना, उनके राजधर्म अंतर्गत उत्तरदायित्वका अविभाज्य अंग होगा !
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