देव स्तुति


विष्णुः शरीरग्रहणं अहम ईशान एव । 
कारितास्ते यतोह्तस्त्वां कः स्तोतुं शक्तिमान भवेत ॥
अर्थ : हे प्रकृति परमेश्वरी ! भगवान विष्णुको, भगवान शंकरको और मुझे (ब्रह्मा) तुमने ही शरीर धारण कराया है; अतः तुम्हारी स्तुति करनेकी शक्ति किसमें है ?


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