देव स्तुति


सदैव पादपंकजं मदीय मानसे निजं ।

दधानमुक्तमालकं नमामि नन्दबालकम् ॥

अर्थ : जिन्होंने मेरे मनरूपी सरोवरमें अपने चरणकमलोंको स्थापित कर रखा है, उन अति सुन्दर पलकोंवाले नन्दकुमारको नमस्कार करता हूं ।



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