देव स्तुति


तपसा  दग्ध-देहाय  नित्यं  योगरताय च ।

नमो नित्यं क्षुधार्ताय अतृप्ताय च वै नम: ॥

अर्थ : आपने तपस्यासे अपनी देहको दग्ध कर लिया है, आप सदा योगाभ्यासमें तत्पर, भूखसे आतुर और अतृप्त रहते हैं । आपको सर्वदा सर्वदा नमस्कार है ।



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