देव स्तुति


तमः स्तोमहारनं जनाज्ञानहारं त्रयीवेदसारं परब्रह्मसारम् ।

मुनिज्ञानकारं विदूरेविकारं सदा ब्रह्मरुपं गणेशं नमामः ॥

अर्थ : जो अज्ञानान्धकार राशिके नाशक, भक्तजनके अज्ञानके निवारक, तीनों वेदोंके सारस्वरूप, परब्रह्मसार, मुनियोंको ज्ञान देनेवाले तथा मनोविकारोंसे सदा दूर रहनेवाले हैं । उन ब्रह्मरूप गणेशको हम नमस्कार करते हैं ।



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