देव स्तुति


चित्ररत्नविचित्राङ्गं चित्रमालाविभूषितम् ।

कायरूपधरं    देवं   वन्देऽहं गणनायकम् ॥

अर्थ : विचित्र रत्नोंसे चित्रित अंगोंवाले, विचित्र मालाओंसे विभूषित तथा शरीररूप धारण करनेवाले उन भगवान गणनायक गणेशकी मैं वन्दना करता हूं ।



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