देव स्तुति


कां सोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम् ।

पद्मेस्थितां       पद्मवर्णां       तामिहोप       ह्वये       श्रियम् ॥

अर्थ : जो साक्षात ब्रह्मरूपा, मन्द-मन्द मुसकुरानेवाली, सोनेके आवरणसे आवृत, दयार्द्र, तेजोमयी, पूर्णकामा, भक्तनुग्रहकारिणी, कमलके आसनपर विराजमान तथा पद्मवर्णा हैं, उन लक्ष्मी देवीका मैं यहां आवाहन करता हूं



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