देव स्तुति


शारदा शारदाम्भोजवदना वदनाम्बुजे ।

सर्वदा सर्वदास्माकं सन्निधिं सन्निधिं क्रियात् ॥

अर्थ : शरत्कालमें उत्पन्न कमलके समान मुखवाली और सब मनोरथोंको देनेवाली , हे शारदा(सरस्वती)! सब सम्पत्तियोंके साथ मेरे मुखमें सदा निवास करें ।



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