अजमेर शरीफपर चढे पुष्पोंसे बन रही उर्वरकपर (खादपर) दरगाह सेवकोंका विरोध !


अक्तूबर ९, २०१८

ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्तीकी दरगाह अजमेर शरीफ, दरगाहमें सहस्त्रों क्विंटल पुष्प प्रतिदिन आते है तो उन्हें बादमें एक पुष्प बावडीमें ठण्डा किया जाता था; लेकिन अब इसे दरगाह कमेटी जैविक उर्वरक (खाद) बनानेमें प्रयोग कर रही है तो खादिमोंका विरोध भी आरम्भ हो गया है ।

अजमेर शरीफ दरगाहके पुष्पोंसे जैविक उर्वरक (खाद) बनानेका कार्य दरगाह समिति और हिन्दुस्तान जिंकने आरम्भ किया था । इस उद्घाटन कार्यक्रममें दरगाह सेवादारोंकी संस्थाके पदाधिकारी भी उपस्थित थे और इसको उन्होंने सराहा भी था । यही कारण था कि स्वच्छ भारत मिशनके अन्तर्गत गत दिवसों प्रधानमन्त्री मोदीसे वीडियो सामूहिक वार्ताकेद्वारा (कांफ्रेंसके) बातचीतमें संस्थाके सदर सैय्यद मोईन हुसैन चिश्तीने कहा था कि दरगाहके दो सहस्त्र सेवक इस जैविक उर्वरकके पैकेटको ‘जायरीन’में वितरण करेंगें और प्रत्येकको कहेंगे कि वो इस खादको अपने घरके गमलेमें मिलाएं ताकि उनके घरमें ख्वाजा साहबके करमसे सुख शान्ति और खुशहाली बनी रहे ।

एक ओर जहां दरगाह समिति दरगाहके पुष्पोंसे जैविक उर्वरकका (खाद) समर्थन करते हुए सेवकोंकी संस्था सदरने ‘जायरीन’को खादके पैकेट जायरीनमें वितरणकी बात कही तो दूसरी ओर पुष्पोंका अनादर और जैविक खाद बनानेका प्रकरण अब बल पकडता ही जा रहा है । दरगाह समितिको अब वहींके सेवकोंके क्रोधका सामना करना पड रहा है ।

खादिमोंमें इस बातको लेकर क्रोध है कि दरगाह कमेटी ख्वाजा साहबके मजारके पुष्पोंका अनादर कर रही है, जबकि ये पुष्प लाखों लोगोकी आस्थासे जुडे हुए है, इसलिए सेवकों और स्थानीय मुस्लिमोंने मिलकर दरगाह कमेटीके विरुद्घ एकता दिखाते हुए दरगाहके पुष्पोंकी बनाई जा रही जैविक खादको तुरन्त रुकवानेका निर्णय लिया है । वहीं मजारके पुष्पोंको दरगाह कमेटीको ना देकर स्वयं जायरीनको अधिक-से-अधिक प्रसादके रूपमें देनेकी बात कही है ।

गौरतलब है कि दरगाह समिति और हिन्दुस्तान जिंकके मध्य दरगाहके पुष्पोंको लेकर जैविक उर्वरक बनानेका कार्य कायड विश्राम स्थलपर आरम्भ किया गया है, जिसमे लाखो रुपयोंकी मशीनें लगाई गई है । इसीके साथ-साथ पुष्पोंसे तैयार हो रही जैविक खादको किसानोंको लाभमें विक्रय किया जा रहा है । खादिमोंका आरोप है कि दरगाहके पुष्प आस्थासे जुडे है और इन्हें रोगोंसे छूटकारा पानेके लिए भी ले जाते है ।

 

“धर्ममें आस्थाके साथ विज्ञान एवं बुद्धिका होना अति आवश्यक है, जो तथाकथित पन्थोंमें नहीं है । समूचे विश्वमें एक सनातन धर्म ही ऐसा है जो प्रकृतिके परमात्मामें विलीन होनेका सुन्दर विधान बताता है, जिससे उल्टा करे या सीधा, परमात्मा ही निकलता है ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : जी न्यूज



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