आजकल अनेक हिन्दू संगठन एवं धर्मगुरु, हिन्दुओंको अधिक सन्ततिको जन्म देनेका सुझाव दे रहे हैं; उनसे यह विनम्रतापूर्वक पूछना चाहूंगी कि यदि आज ९५ कोटि हिन्दूके रहते हुए प्रतिदिन हिन्दुओंके आस्थाकेन्द्रोंपर एवं हिन्दुओंपर इतने आघात हो रहे हैं तो क्या २०० कोटि हिन्दू होनेपर, यह स्थिति परिवर्तित हो जाएगी ? ध्यान रहे, निद्रिस्त हिन्दू चाहे सौ कोटि हो या दो सौ कोटि, उनका होना या न होना एक समान है । इसी देशमें कुछ शतक पूर्व ही मुट्ठी भर मराठों, मेवाडियों, सिखों और भीलोंने मुगल आक्रान्ताओंको गाजर-मूली समान काटकर इतिहास रचे हैं; अतः हिन्दुओ ! जब यह देश पहलेसे ही जनसंख्या विस्फोटकी समस्यासे निर्मित अन्य समस्याओंसे झूझ रहा है तो ऐसेमें जनसंख्यामें और वृद्धि करना कहांकी बुद्धिमानी है ? इसके विपरीत आपकी जितनी भी सन्तानें हों, उन्हें धर्मशिक्षण देकर छत्रपति शिवाजी महाराज, महाराणा प्रताप, गुरु गोबिंद सिंह, रानी दुर्गावती, रानी लक्ष्मीबाई इत्यादि समान तेजस्वी बनाएं ! क्षात्रतेज एवं ब्राह्मतेजसे युक्त एक-एक हिन्दू योद्धा अनेक धर्मकंटकोंपर भारी पडेगा और ब्राह्मतेजसे युक्त होनेके कारण ईश्वर उनका रक्षण भी करेंगे -तनुजा ठाकुर (४.९.२०१६)
Leave a Reply