
हमारे आश्रममें कुछ दिवस पूर्व एक युवा जिज्ञासु साधना सीखने हेतु आए थे । उनके अभिभावक चाहते थे कि वे प्रशासनिक अधिकारी बने । उन्होंने बताया कि उनके दादाजीने उनसे कहा, “तुम प्रशासनिक अधिकारी बनकर दिखाओ, चाहे भ्रष्ट अधिकारी ही बन जाना; किन्तु मैं तुम्हें लाल बत्तीमें घूमते हुए देखना चाहता हूं, जिससे मैं सबको सीना तानकर कह सकूं कि मेरा पोता अधिकारी पदपर है । देखें, कभी उच्च आदर्शकी शिक्षा देनेवाले अभिभावक, आज अपनी अगली पीढीको किस प्रकार दिशाहीन करते हैं -तनुजा ठाकुर
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