जून २०१३ इटली में एक सर्व धर्म संगोष्ठीमें मैंने कहा कि हिन्दू धर्म , सिक्ख, बौद्ध , जैन एवं ऐसे अनेक पंथोंकी जननी है तो मेरी इस बात से वहाँ उपस्थित अन्य हिन्दू पंथों के प्रतिनिधियों की भृकुटी तन गयी क्योंकि उन्हें अब हिन्दुत्त्वसे किसी भी प्रकारका संबंध अच्छा नहीं लगता है ! तुलसीदासजी ने कहा है कि पुत्र चाहे कुपुत्र हो जाये माता कभी कुमाता नहीं होती तो आप अपने मूल जननी से अपने आप को भिन्न समझकर जो करना चाहे करें , माँ तो कीचड़ में लिपटे बच्चे को भी अपने आँचल में सप्रेम स्थान देती है तभी तो वह मां कहलाती है ! ऐसी ही मां का नाम वैदिक सनातन धर्म है जिसका मूल सिद्धान्त है सर्वेषाम अविरोधेन ! और हिन्दू धर्म की इसी विशेषता ने इसे कालातीत बनाया है ! -तनुजा ठाकुर
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