पांच पौराणिक पात्र जो रामायण और महाभारत, दोनों समय थे उपस्थित !


१. हनुमान
रामायणमें प्रमुख भूमिका निभानेवाले श्रीराम भक्त हनुमान महाभारतमें महाबली भीमसे पाण्डवोंके वनवासके समय मिले थे। कुछ स्थानोंपरतो यह भी कहा गया है कि भीम और हनुमान दोनों भाई हैं; क्योंकि भीम और हनुमान दोनी ही पवन देवके पुत्र थे।
२. परशुराम
अपने समयके महातेजस्वी ब्रह्मर्षि परशुरामको कौन नहीं जानता ?उन्होंने२१बार पृथ्वीकी परिक्रमा कर दुर्जन क्षत्रियोंका संहार किया था । रामायणमें उनका वर्णन तब आता है जब राम, सीताके स्वंयवरमें शिवका धनुष तोडते हैं, जबकि महाभारतमें वे भीष्मके गुरु बनते हैं तथा एक समय भीष्मके साथ भयंकर युद्ध भी करते हैं । इसके साथ ही वे महाभारतके कर्णके भी गुरु रहे हैं ।
३. जाम्बवन्त
रामायणमें जाम्बवन्तजीका वर्णन प्रभु श्रीरामके प्रमुख सहयोगीके रूपमें मिलता है। जाम्बवन्त ही रामसेतुके निर्माणमें प्रमुख भूमिका निभाते हैं, जबकि महाभारतमें जाम्बवन्त, भगवान श्रीकृष्णके साथ युद्ध करते हैं तथा यह ज्ञात होनेपर कि वे विष्णु अवतार हैं, अपनी पुत्री जामवन्तीका विवाह श्रीकृष्णके साथ कर देते हैं ।
४. मयासुर
बहुत ही कम लोगोंको ज्ञात होगा कि रावणके ससुर अर्थात्मन्दोदरीके पिता मयासुर एक ज्योतिष तथा वास्तुशास्त्रज्ञ थे। इन्होंने ही महाभारतमें युधिष्ठिरके लिए सभाभवनका निर्माण किया था जो मयसभाके नामसे प्रसिद्ध हुआ। इसी सभाके वैभवको देखकर दुर्योधन पाण्डवोंसे ईर्ष्या करने लगा था और कहीं न कहीं इसी ईर्ष्याने आगे चलकर वीभत्स रूप लिया और यही महाभारतके युद्धका कारण बनी ।
५. महर्षि दुर्वासा
हिन्दुओंके एक महान ऋषि महर्षि दुर्वासा रामायणमें एक बहुत ही बडे भविष्यवक्ता थे। इन्होंने ही रघुवंशके भविष्य सम्बन्धी बहुत सारी बातें राजा दशरथको बताईंथीं । वहीं दूसरी ओर महाभारतमें भी पाण्डवोंके निर्वासनके समय महर्षि दुर्वासा द्रोपदीकी परीक्षा लेने हेतु अपने दस सहस्र शिष्योंके साथ उनकी कुटियामें पहुंचे थे ।

 



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