आस्थाके प्रति घृणा सशस्त्र बलोंके सैनिकोंको प्रभावित करेगा, धर्म-संसदके विरुद्ध ३ सेवानिवृत सैन्य अधिकारियोंने उच्चतम न्यायालयमें दी याचिका
१६ जनवरी, २०२२
उत्तराखंडके हरिद्वार और देहली धर्म-संसदमें गत वर्ष दिसम्बरमें दिए गए कथित द्वेष भरे सम्बोधनकी जांचके लिए एक विशेष जांच दल गठित करनेकी मांगको लेकर भारतीय सेनाके तीन सेवानिवृत्त अधिकारियोंने उच्चतम नयायालयमें याचिका प्रविष्ट की है । उनका कहना है कि यदि ऐसे कार्यक्रमोंपर कार्यवाही नहीं की तो ये देशकी आन्तरिक और राष्ट्रीय सुरक्षाके लिए बडा सङ्कट बन जाएंगे ।
समाचार प्रतिवेदनके अनुसार, संविधानके अनुच्छेद-३२ के अन्तर्गत प्रविष्ट याचिकामें गत वर्ष १७ से १९ दिसम्बरके मध्य हरिद्वार और देहलीमें आयोजित धार्मिक कार्यक्रमोंके विरुद्ध जांचकी मांग की गई है । मेजर जनरल सेवानिवृत एसजी वोंबाटकरे, कर्नल सेवानिवृत पीके नायर और मेजर सेवानिवृत प्रियदर्शी चौधरीने अपनी याचिकामें कहा है कि आस्थामें मतभेदोंके आधारपर विषैली घृणाको बढावा सशस्त्र बलोंके सैनिकोंको प्रभावित करेगा, जो विभिन्न समुदायों और धर्मोंसे आते हैं।
याचिकाकर्ताओंने यह भी कहा कि साम्प्रदायिक हिंसाको उकसाना समाजके सामाजिक ताने-बानेके लिए बडा सङ्कट है । उन्होंने इस बातपर भी ध्यान दिलाया कि सशस्त्र बलोंके पांच पूर्व प्रमुख और विभिन्न क्षेत्रोंसे जुडे प्रमुख व्यक्ति पहले ही राष्ट्रपति और प्रधानमन्त्रीको इन सम्बोधनोंके विषयमें अपनी चिन्ता व्यक्त करते हुए लिख चुके हैं ।
यह एक विडम्बना ही है कि वामपन्थी बुद्धिजीवियों एवं तथाकथित धर्मनिरपेक्ष लोगोंको न ही जिहादियोंके घृणित वक्तव्य सुनाई देते हैं न ही उनके विरुद्ध कोई अभियोग प्रविष्ट करवाते हैं; परन्तु हिन्दू अपनी संस्कृति एवं स्वरक्षाके लिए शस्त्रकी बात भी कर ले तो उसे दोषी मानकर सामाजिक जालस्थलपर मानसिक रूपसे प्रताडित भी करते हैं और न्यायालयमें परिवाद भी करते हैं । हिन्दुओ, वैध मार्गसे इस विचारधाराका विरोध करो और स्वयंकी रक्षाके लिए सज्ज भी रहें ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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