अगस्त २८, २०१८
रक्षाबन्धन पर्वपर देवबन्द कोतवालको मुस्लिम महिलाद्वारा राखी बांधनेको लेकर विवाद हो गया है ! देवबन्दी उलमाका कहना है कि मुस्लिम महिलाका राखी बांधना अनुचित है; क्योंकि इस्लाममें महिलाओंको पर्देसे बाहर निकलने और गैर पुरुषके शरीरको छूनेकी आज्ञा नहीं है ।
मदरसा दारुल उलूम निसवाके नायब मोहतमिम मौलाना नजीफ कासमीका कहना है कि राखी बांधना, बंधवाना और टीका लगानेका इस्लाममें कोई स्थान नहीं है । जो लोग ऐसा कर रहे हैं वो इस्लामसे दूर होनेके साथ-साथ बलपूर्वक इस्लामके भीतर इन चीजोंको सम्मिलित कर रहे हैं, जो अनुचित है ! उन्होंने कहा कि हदीसमें आया है कि जिसने किसी कौमकी परम्पराओंको अपनाया वो उसी कौममें से है, इस्लाम से नहीं ! मुफ्ती तारिकका कहना है कि राखी बांधने वाली महिलाने जो किया वो शरिया अनुसार नहीं है; इसलिए महिलाको अपने कृत्यकी क्षमा मांगनी चाहिए । मजलिस इत्तेहाद-ए-मिल्लतके प्रदेशाध्यक्ष मुफ्ती अहमद गौडका कहना है कि इस्लाम धर्म मुस्लिम महिलाओंको राखी बांधने और टीका लगानेकी आज्ञा नहीं देता; क्योंकि ऐसा करने से बेपर्दगी होती है और राखी बांधनेके लिए गैर पुरुषके शरीरको छूना पडता है, जबकि इस्लाममें गैर महरमको छूना या बिना पर्देके उसके सामने जानेको नाजायज बताया गया है ।
“क्या महिला केवल कामवासनाकी तृप्ति हेतु उसके पुरुषके लिए है , क्या वह बहन, पुत्री आदि नहीं है ? क्या पुरुषोंको इस्लाममें पर्दा अथवा लज्जा जैसी वस्तु नहीं है, जो बहुविवाह कर अनेक बच्चें पैदा करता है” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ ।
स्रोत : अमर उजाला
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