यह सम्पूर्ण सृष्टि कर्मफलके सिद्धान्तद्वारा संचालित होती हैं ! जिन पापियोंको यह लगता है कि इस जगतके न्याय प्रणालीसे वह बचकर अपने पापके फल भोगनेसे मुक्त हो जाएगा, उसे मृत्यु उपरान्त और भी अधिक कठोर दण्ड दिया जाता है और उसका कुल, उसके कर्मोंका आंशिक फल भोगता है और अपने पापकर्मके ब्याज, वह अगले जन्मोंमें दारिद्र्य, अपंगता, अपयश, मानसिक क्लेश इत्यादिके रूपमें भोगता है ।
Leave a Reply