नदियोंकी स्वच्छता हमारा परम धर्म


दो दिवस पूर्व जब नर्मदा स्नानपर हेतु स्थित घाटपर गई तो घाटका जल इतना अशुद्ध था कि वहां स्नान करनेकी इच्छा नहीं हो रही थी । वहां लिखा हुआ था कि घाटपर साबुनसे स्नान न करें एवं वस्त्र धोएं नहीं; किन्तु मूढ और स्वार्थी हिन्दू वह सब करते हैं, जिससे हमारी नदियां अस्वच्छ और दूषित होती हैं । हिन्दू राष्ट्रके पाठ्यक्रमोंमें ये सब विषय पढाए जाएंगे, जिससे नदियोंकी पवित्रता और स्वच्छता दोनों ही विद्यामान रहे । साथ ही नर्मदा नदीपर इतने बांध बना दिए गए हैं कि तीर्थक्षेत्रोंमें श्रद्धालुओंको स्नान करनेके लिए नदियोंमें जल नहीं रहता है । निधर्मी लोकतन्त्रने हिन्दू धर्मके सर्व धार्मिक प्रतीक स्थानोंकी भरपूर विडम्बना की है; इसलिए इसके स्थानपर धर्म अधिष्ठित राष्ट्रप्रणालीकी स्थापना होनी ही चाहिए ।



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