आध्यात्म और राष्ट्रधर्ममें अद्वैत है ।


कुछ ‘व्हाट्सएप’ गुट हमें पहले जोडते हैं और उसके पश्चात सूक्ष्म सम्बन्धी बातों या राष्ट्र सम्बन्धी विचारोंको पढकर हमें गुटसे निकाल देते हैं ! ऐसे सभी लोगोंको बता दें कि अध्यात्ममें शाब्दिक ज्ञानका महत्त्व मात्र २% और शब्दातीत अर्थात सूक्ष्म सम्बन्धी शास्त्रका महत्त्व ९८% है और हमारी संस्था धर्म और अध्यात्मके दोनों पक्षोंको सिखाती है और जिन लोगोंको लगता है राष्ट्र सम्बन्धी बातें धर्ममें नहीं होनी चाहिए, वे यह अच्छेसे जान लें धर्म और राष्ट्रमें अद्वैत होता है; अतः कालानुसार दोनोंके विषयमें प्रबोधन करनेपर ही हिन्दू संस्कृतिका अस्तित्व बना रह सकता है ! कुछ तो यह भी कहते हैं यदि राजनीतिकी बातें न समाविष्ट करें तो हम आपको पाने गुटमें जोडेंगे तो ऐसे सभी लोगोंको बता दें हम धर्मके सर्वांगीण पक्षका प्राबोधन करते हैं और यही हमारा धर्म है और धर्म विरुद्ध आचरण करना हमारे श्रीगुरुने हमें नहीं सिखाया । मुट्ठी भर लोगोंद्वारा सत्य स्वीकार न करनेपर भी सत्य, सत्य ही रहता है और धर्मका तेज तो ऐसा है कि आज नहीं तो कल, वह फैलेगा ही, इसके लिए हमें हमारे आदर्शोंको त्यागनेकी आवश्यकता नहीं है !



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